डीएम-एसपी ने की 52 किलोमीटर की ट्रेकिंग, पर्यटन सुविधाओं को मिलेगी नई दिशा




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  • पहाड़ की चुनौतियों को करीब से समझने निकले जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे और एसपी जितेंद्र मेहरा

न्यूज 127, नवीन चौहान।
पिंडारी ग्लेशियर की दुर्गम पहाड़ियों में पर्यटन की संभावनाओं को नई दिशा देने और ट्रेकिंग मार्ग पर पर्यटकों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे और पुलिस अधीक्षक जितेंद्र मेहरा ने अनूठी पहल की है। अधिकारियों ने कागजों पर योजनाएं बनाने के बजाय खुद पहाड़ की कठिन राहों पर उतरकर करीब 52 किलोमीटर की ट्रेकिंग की। इस दौरान उन्होंने दुर्गम रास्तों, पहाड़ी परिस्थितियों और ट्रेकिंग के दौरान आने वाली चुनौतियों को करीब से महसूस किया। अधिकारियों का यह जमीनी अनुभव आने वाले समय में पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और पर्यटक-अनुकूल बनाने की कार्ययोजना तैयार करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

पिंडारी ग्लेशियर उत्तराखंड के प्रमुख साहसिक पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां देश-विदेश से पर्यटक और प्रकृति प्रेमी पहुंचते हैं। हालांकि, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, रास्तों की चुनौतियों और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता के कारण इस क्षेत्र में पर्यटन विकास की व्यापक संभावनाओं के साथ कई व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं। जिलाधिकारी और एसपी की इस पहल का उद्देश्य इन चुनौतियों को प्रत्यक्ष रूप से समझकर उनके समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाना है।

पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधाओं पर रहेगा विशेष ध्यान
ट्रेकिंग के दौरान अधिकारियों ने पहाड़ की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का अनुभव किया। किसी भी ट्रेकिंग मार्ग पर पर्यटकों की सुरक्षा, मार्ग की स्थिति, आवश्यक सुविधाओं और आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में प्रशासन और पुलिस के शीर्ष अधिकारियों का स्वयं इस मार्ग पर पहुंचना पर्यटन विकास की जरूरतों को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे ने बताया कि ट्रेकिंग शनिवार सुबह शुरू की गई है और मंगलवार देर शाम तक गंतव्य तक पहुंचने का कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि इस अनुभव के आधार पर क्षेत्र में पर्यटकों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

पर्यटन से स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार
पिंडारी ग्लेशियर क्षेत्र में पर्यटन विकास का उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका के अवसरों का विस्तार करना भी है। ट्रेकिंग मार्ग को बेहतर बनाने और पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित करने से स्थानीय युवाओं को गाइड, पोर्टर, होमस्टे, खानपान और अन्य पर्यटन संबंधी गतिविधियों में रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे ने कहा कि कि ट्रेकिंग के बाद वन विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसमें क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, पर्यटकों की जरूरतों और स्थानीय लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए विकास की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।

अनुभव के आधार पर बनेगी विकास की कार्ययोजना
प्रशासनिक अधिकारियों की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में योजनाओं की सफलता के लिए स्थानीय परिस्थितियों की वास्तविक समझ जरूरी है। करीब 50 किलोमीटर की ट्रेकिंग के दौरान प्राप्त अनुभव से पिंडारी ग्लेशियर मार्ग की चुनौतियों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित करने और व्यावहारिक समाधान तलाशने में मदद मिल सकती है।