अखाड़ों में जेन-जी की भागीदारी से नई पीढ़ी तक पहुंचेगी सनातन परंपरा




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महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने कहा-सभी अखाड़े मिलकर कुंभ को बनाएंगे दिव्य और भव्य

न्यूज 127, हरिद्वार।
हरिद्वार में वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले कुंभ पर्व को दिव्य और भव्य स्वरूप प्रदान करने के लिए संत समाज और अखाड़ों के बीच समन्वय की पहल तेज हो रही है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने कुंभ में सभी अखाड़ों की एकजुटता और नई पीढ़ी की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।

कुंभ भारतीय सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और संत परंपरा का विराट आयोजन है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद साझा मंच के रूप में अखाड़ों के बीच समन्वय का कार्य करती है, जबकि प्रत्येक अखाड़े की अपनी अलग परंपरा, साधना पद्धति और धार्मिक पहचान है। इन विविधताओं के बीच सामंजस्य ही कुंभ की विशिष्टता को और व्यापक बनाता है।

कुंभ में जेन-जी यानी युवा पीढ़ी की भागीदारी से सनातन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। डिजिटल माध्यमों से जुड़ी युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और धार्मिक परंपराओं को समझने के साथ इनके प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव के अनुसार, सभी अखाड़ों के सामूहिक सहयोग और संत समाज की एकजुटता से कुंभ को दिव्य एवं भव्य स्वरूप देने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। कुंभ की सफलता के लिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान, आपसी समन्वय और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं आवश्यक हैं।

हरिद्वार कुंभ-2027 केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की विविधता, संतों की परंपरा और नई पीढ़ी के जुड़ाव का भी महत्वपूर्ण अवसर होगा।