सेवानिवृत्त पुलिस कर्मियों को मिले ‘सम्मानजनक रैंक’ — मुख्यमंत्री और डीजीपी को प्रस्ताव








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हरिद्वार।
उत्तराखंड राज्य के पुलिस कर्मियों की सेवा परिस्थितियों और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले सम्मान को लेकर हरिद्वार के अधिवक्ताओं ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। हरिद्वार के अरुण भदोरिया एडवोकेट, कमल भदोरिया एडवोकेट, श्रीमती सुमेधा भदोरिया एडवोकेट, चेतन भदोरिया (एलएलबी अध्यनरत), आयुष जायसवाल (एलएलबी अध्यनरत) और शाहनवाज मलिक (एलएलबी अध्यनरत) ने उत्तराखंड सरकार को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजते हुए पुलिस कर्मियों के लिए “सम्मानजनक रैंक कल्याण योजना” लागू करने की मांग की है।
अरुण भदोरिया एडवोकेट की ओर से यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार देहरादून और पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड को भेजा गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त हो जाते हैं, जैसा कि सरकारी कर्मचारियों के लिए मूल नियमों में निर्धारित है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि कोई कर्मचारी अपने जीवन के लगभग 30 से 35 वर्ष सेवा में देने के बावजूद हेड कांस्टेबल, एएसआई या एसआई जैसे पदों पर ही सेवानिवृत्त हो जाता है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि दशकों तक समर्पित सेवा देने के बाद भी कई पुलिस कर्मियों को कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक बिना किसी औपचारिक सम्मान या विशेष पदोन्नति के सेवानिवृत्त होना पड़ता है, जिससे उनके मनोबल और आत्मसम्मान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे कर्मचारियों में स्वयं को कम आंका जाने और उपेक्षित महसूस करने की भावना भी पैदा हो सकती है।
भदोरिया ने अपने प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया है कि सम्मान की कमी से भावनात्मक तनाव, पहचान की कमी और उपेक्षा की भावना पैदा होती है। साथ ही सशस्त्र बलों की तरह औपचारिक सम्मान या सम्मानजनक रैंक न मिलने के कारण कई सेवानिवृत्त पुलिस कर्मियों को असमानता का अनुभव भी होता है।
एक माह पहले मिले एक रैंक ऊपर का सम्मानजनक पद
इस समस्या के समाधान के लिए प्रस्ताव में सुझाव दिया गया है कि उत्तराखंड पुलिस के सभी सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को, कांस्टेबल से लेकर आईजी रैंक तक, सेवानिवृत्ति की तिथि से एक माह पूर्व एक पद ऊपर का सम्मानजनक रैंक दिया जाए।
प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह पदोन्नति केवल सम्मानजनक (Honorary Rank) होगी और इसका किसी प्रकार का वित्तीय या पेंशन संबंधी प्रभाव नहीं होना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य पुलिस कर्मियों के मनोबल, गर्व और सामाजिक सम्मान को बढ़ाना है।
योजना से मिलने वाले संभावित लाभ
प्रस्ताव में इस पहल के कई सकारात्मक लाभ भी बताए गए हैं। इसके तहत
पुलिस कर्मियों की समर्पित सेवा को औपचारिक मान्यता मिलेगी।
सेवानिवृत्त कर्मियों की गरिमा और आत्मसम्मान में वृद्धि होगी।
उत्तराखंड पुलिस में मजबूत कल्याणकारी संस्कृति का निर्माण होगा।
कर्मचारी अपने करियर के अंत में संस्थागत सम्मान और गर्व की भावना के साथ सेवा से विदा लेंगे।
समाज में सेवानिवृत्त कर्मियों की पहचान और सामाजिक सम्मान भी बढ़ेगा।
अरुण भदोरिया ने मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक से आग्रह किया है कि इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करते हुए राज्य के पुलिस कर्मियों के हित में सम्मानजनक रैंक कल्याण योजना लागू की जाए, ताकि सेवा के अंत में हर पुलिस कर्मी गरिमा, गर्व और बढ़ी हुई सामाजिक मान्यता के साथ सेवानिवृत्त हो सके।