उज्जैन।
श्री पंचायती अखाड़ा तपोनिधि निरंजनी के महामंडलेश्वर और उज्जैन स्थित प्रसिद्ध चारधाम मंदिर के परमाध्यक्ष स्वामी शांति स्वरूपानंद महाराज को हनी ट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल करने की कथित साजिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में पूर्व महामंडलेश्वर साध्वी मंदाकिनी पुरी और उनके सहयोगी घनश्याम पटेल के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। आरोप है कि दोनों ने संत की छवि खराब करने और उनसे अवैध वसूली करने के उद्देश्य से सुनियोजित षड्यंत्र रचा था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस साजिश को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने बनारस की एक महिला को पैसों का लालच देकर अपने साथ शामिल किया था। योजना यह थी कि महिला के माध्यम से महामंडलेश्वर पर बलात्कार का झूठा आरोप लगवाया जाए और बाद में मामला वापस लेने के बदले उन्हें ब्लैकमेल किया जाए। हालांकि पुलिस की सक्रियता के चलते यह साजिश समय रहते उजागर हो गई।
रंगपंचमी के दिन खुला मामला
महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल के अनुसार रंगपंचमी के दिन दत्त अखाड़ा परिसर में कुछ संदिग्ध लोगों के पकड़े जाने की सूचना मिली थी। महंत आनंद पुरी महाराज ने इन लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया। पुलिस ने मौके से एक महिला को पूछताछ के लिए थाने लाया और वहां मौजूद सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य तथ्यों की जांच शुरू की।
पूछताछ के दौरान महिला ने बताया कि 27 फरवरी को घनश्याम पटेल उससे मिलने बनारस आया था। उसने 50 हजार रुपए देने का लालच देकर उज्जैन आकर महामंडलेश्वर के खिलाफ झूठा बलात्कार का मामला दर्ज कराने के लिए कहा था। जब महिला ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया तो उसे धमकी दी गई कि उसके अश्लील फोटो वायरल कर दिए जाएंगे। डर के कारण वह घनश्याम के संपर्क में बनी रही। महिला के अनुसार घनश्याम ने उसके बेटे के मोबाइल पर दो हजार रुपए भेजे और उज्जैन आने के लिए संजय ट्रैवल्स से टिकट भी बुक कराया।
दत्त अखाड़ा परिसर में रिकॉर्ड हो रहा था बयान
बताया गया कि 8 मार्च को रंगपंचमी के दिन घनश्याम पटेल अपने साथियों के साथ उज्जैन के दत्त अखाड़ा परिसर पहुंचा था। आरोप है कि वहां महिला का बयान रिकॉर्ड किया जा रहा था। इसी दौरान आनंदपुरी महाराज, पंडित लोकेश शर्मा और संजय गोस्वामी वहां पहुंच गए। मामले की जानकारी मिलने पर उन्होंने तत्काल पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा को सूचित किया, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी।
महिला के बयान और मोबाइल की जांच के आधार पर पुलिस ने साध्वी मंदाकिनी पुरी निवासी गढ़कालिका और घनश्याम पटेल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। थाना प्रभारी गगन बादल के अनुसार मामले की जांच जारी है और इस साजिश से जुड़े अन्य लोगों की भी भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
वायरल वीडियो और आरोप-प्रत्यारोप
इधर एफआईआर दर्ज होने के बाद घनश्याम पटेल ने भी महिला के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए, जिनमें वह महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद महाराज पर गंभीर आरोप लगाती नजर आ रही है। इसके साथ ही एक पत्र जारी कर उसने दावा किया कि महिला का इंटरव्यू न चलाने और एक लाख रुपये की कथित एक्सटॉर्शन राशि न देने के कारण उसके खिलाफ साजिश के तहत फर्जी एफआईआर कराई गई है।
वहीं महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद महाराज का कहना है कि कुछ लोग चारधाम मंदिर पर कब्जा करना चाहते हैं और इसी उद्देश्य से उन्हें बदनाम करने के लिए षड्यंत्र रचा गया है।
मंदाकिनी पुरी पर पहले भी लगे हैं आरोप
साध्वी मंदाकिनी पुरी का नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। बताया जाता है कि पूर्व महामंडलेश्वर नर्मदाशंकर पुरी महाराज से भी उन्होंने उन्हें आचार्य महामंडलेश्वर बनाने का झांसा देकर करीब 8 लाख 90 हजार रुपये लिए थे। यह राशि सात महीनों में अलग-अलग किस्तों में ऑनलाइन ट्रांसफर की गई थी। बाद में इस मामले के उजागर होने पर अखाड़े ने मंदाकिनी पुरी को संगठन से बाहर कर दिया था।
बताया जाता है कि इस विवाद के बाद 7 मई को मंदाकिनी पुरी ने कथित रूप से कीटनाशक पी लिया था, जिसके बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया था।
जयपुर के व्यापारी ने भी लगाया धोखाधड़ी का आरोप
मंदाकिनी पुरी पर जयपुर के एक व्यापारी ने भी धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। व्यापारी ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी से शिकायत करते हुए कहा था कि मंदाकिनी पुरी ने उसकी कंपनी से हर्बल जूस खरीदे और उन पर अपनी फोटो लगाकर “मां आरोग्यम मंदाकिनी” नाम से स्टॉक तैयार कराया। आरोप है कि उन्होंने सामान के पैसे नहीं चुकाए और एक्सपायरी डेट निकलने के बाद पूरा माल कंपनी को वापस भेज दिया, जिससे व्यापारी को करीब दो लाख रुपये का नुकसान हुआ।
साधारण पृष्ठभूमि से महामंडलेश्वर तक का सफर
बताया जाता है कि ममता जोशी उर्फ मंदाकिनी पुरी पहले संतों के धार्मिक आयोजनों में रसोई बनाने का काम करती थीं। इसी दौरान उनका संपर्क साधु-संतों से हुआ। बाद में खुद को संन्यासी बताते हुए उन्होंने अनंतानंद महाराज की मदद से तत्कालीन अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि महाराज से संपर्क बढ़ाया। वर्ष 2016 में उज्जैन सिंहस्थ के दौरान निरंजनी अखाड़े के पट्टाभिषेक कार्यक्रम में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की थी।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और इस कथित साजिश से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।
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