हरिद्वार के राजकीय मेडिकल कॉलेज में निजी भागेदारी, जनता को कैसे पड़ेगी भारी








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न्यूज 127.
हरिद्वार के जगजीतपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज में निजी भागेदारी होने के बाद से ही कॉलेज सुर्खियों मेें है। एमबीबीएस प्रथम बैंच के सभी स्टूडेंटस आंदोलन कर रहे है। उत्तराखंड सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे है। डॉक्टर बनने से पहले ही डिग्री पर संकट खड़ा हो गया है। हालांकि सरकार की ओर से बच्चों की फीस नही बढ़ाने का आश्वासन दिया गया है। बच्चों की सभी मांगों को लेकर प्राचार्य के माध्यम से एक ज्ञापन शासन और सरकार तक भेजा जा चुका है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के पीपीपी मोड को बारीकी से समझने की कोशिश करते है। पीपीपी का पूरा नाम सार्वजनिक-निजी भागीदारी होता है। सरकार की यह एक ऐसी व्यवस्था होती है। जिसमें सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर किसी भी परियोजना को पूरा करने के लिए काम करते हैं। उस व्यवस्था को संचालित करने का कार्य करते है। पीपीपी मोड में संचालित होने वाले उपक्रमों में सरकार की व्यवस्था होती है। सरकार की ओर से उस परियोजना के लिए ज़मीन या अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाते है। जबकि निजी क्षेत्र धन, तकनीक और प्रबंधन कौशल प्रदान करता है।
ऐसा ही राजकीय मेडिकल कॉलेज जगजीतपुर के मामले में हुआ है। केंद्र सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट को राज्य सरकार के सहयोग से पूरा करके हरिद्वार को मेडिकल कॉलेज की सौगात दी गई है। जिसमें प्रत्येक वर्ष 100 स्टूडेंटस एमबीबीएस की डिग्री हासिल करेंगे। जबकि 500 बेड के हॉस्पिटल में इलाज की सुविधा मिलेगी।
पीपीपी मोड के फायदे समझते है
किसी भी योजना के पीपीपी मोड में संचालित होने से उस संस्था को तेजी से विकास होता है। निजी क्षेत्र के दखल के कारण, पीपीपी परियोजनाएं आमतौर पर सरकारी परियोजनाओं की तुलना में तेज़ी से पूरी होती हैं। उनकी बेहतर गुणवत्ता होती है। निजी क्षेत्र के कुशल प्रबंधन के कारण, पीपीपी परियोजनाएं आमतौर पर सरकारी परियोजनाओं की तुलना में कम खर्चीली होती हैं। किफायती दरों पर प्रबंधन होता है। निजी क्षेत्र नए विचारों और नई तकनीकों को जल्दी लागू करने में सफल होगा।
पीपीपी मोड के नुकसान भी अधिक है
हॉस्पिटल के निजी क्षेत्र की दखल होने के बाद निजी संस्था को नुकसान होने का रिस्क भी है। अपने नुकसान की भरपाई के लिए निजी संस्था मनमाने तरीके इस्तेमाल कर सकती है। हिडन चार्ज लगाकर जनता का उत्पीड़न कर सकती है।
पीपीपी मोड का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है, जैसे:
सड़कें और पुल: कई देशों में सड़कें और पुल पीपीपी मोड के तहत बनाए जाते हैं।
शिक्षा: कुछ स्कूल और विश्वविद्यालय पीपीपी मोड के तहत संचालित होते हैं।
स्वास्थ्य: कुछ अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र पीपीपी मोड के तहत संचालित होते हैं।
पानी और सीवरेज: कई शहरों में पानी और सीवरेज सिस्टम पीपीपी मोड के तहत बनाए जाते हैं।