डीएवी स्कूल में विद्यारम्भ समारोह बना आस्था, शिक्षा और संस्कारों का संगम








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हरिद्वार
शिक्षा के प्रथम सोपान को संस्कारों से जोड़ते हुए डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल, जगजीतपुर, हरिद्वार में नर्सरी कक्षा में प्रवेश लेने वाले नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों का विद्यारम्भ संस्कार अत्यंत श्रद्धा, गरिमा और उल्लास के साथ संपन्न किया गया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक शुरुआत नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन में ज्ञान, संस्कृति और नैतिक मूल्यों की आधारशिला रखने का प्रेरक अवसर बन गया।


विद्यालय परिसर में आयोजित इस पावन कार्यक्रम में बच्चों के साथ उनके अभिभावकों की उपस्थिति ने इसे और अधिक भावनात्मक एवं पारिवारिक स्वरूप प्रदान किया। वैदिक परंपरा के अनुरूप यज्ञशाला में हवन का आयोजन किया गया, जहां वेद मंत्रों की गूंज और आहुतियों की सुगंध से वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक हो उठा। ‘सुखी बसे संसार सब’ की सामूहिक प्रार्थना ने पूरे माहौल को श्रद्धा, शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य मनोज कुमार कपिल ने कहा कि विद्यारम्भ संस्कार केवल अक्षर ज्ञान की शुरुआत नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों के संचार का प्रथम अध्याय है। उन्होंने कहा कि विद्यालय में बच्चों को केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित शिक्षा नहीं दी जाती, बल्कि उन्हें सहयोग, अनुशासन, सहनशीलता, खेल भावना, प्रकृति प्रेम और मानवीय संवेदनाओं से भी परिचित कराया जाता है। यही गुण उन्हें भविष्य में एक सफल और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में अग्रसर करते हैं।

उन्होंने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों के समग्र विकास में विद्यालय और परिवार दोनों की समान भूमिका होती है। यदि अभिभावक विद्यालय के संस्कारों को घर में भी सुदृढ़ करें, तो बच्चों का व्यक्तित्व और अधिक प्रभावशाली बन सकता है।
प्रधानाचार्य ने डीएवी संस्था के 140 वर्षों के गौरवपूर्ण इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि इस संस्था ने देश और दुनिया को अनेक प्रतिभाशाली व्यक्तित्व दिए हैं, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उत्कृष्टता का परचम लहराया है।उन्होनें अभिभावकों को बताया कि डीएवी संस्था के छात्रों ने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है चाहे वह विज्ञान हो या राजनीति, अंतर्राष्ट्रीय खेल हों या सिनेमा, कला, व्यवसाय हो या अन्य कोई क्षेत्र, डीएवी के छात्रों ने अपनी अलग ही पहचान बनाई है। भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह, इंद्र कुमार गुजराल, भूतपूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, शहीदेआज़म सरदार भगत सिंह, लाला लाजपत राय, फिल्म कलाकार सुनीत दत्त, अमरीष पुरी, अनुपम खेर, अनुराग कश्यप, खेल जगत में कपिल देव, महेन्द्र सिंह धोनी, युवराज सिंह, साक्षी मलिक, नीरज चोपड़ा, व्यवसाय जगत में नवीन जिंदल, विज्ञान में कल्पना चावला, पत्रकारिता में विनोद दुआ, गज़ल सम्राट जगजीत सिंह तो केवल कुछ नाम हैं।
प्री-प्राइमरी कक्षाओं की सुपरवाइजरी हेड कुसुम बाला त्यागी ने सभी अभिभावकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छोटे बच्चों के लिए विद्यालय का पहला अनुभव अत्यंत संवेदनशील होता है। ऐसे में अध्यापिकाएं उन्हें स्नेह, धैर्य और कुशलता से संभालते हुए खेल-खेल में शिक्षा और संस्कारों की नींव मजबूत करती हैं।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों की मासूम मुस्कान, अभिभावकों की भावुकता और शिक्षकों का स्नेहिल व्यवहार एक सुखद एवं यादगार दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।
अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ, लेकिन यह दिन उन नन्हे विद्यार्थियों के जीवन में एक नई शुरुआत के रूप में सदैव यादगार बन गया, जहां से उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा तय होने लगी।