डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल, हरिद्वार में आर्य समाज वैदिक धर्म प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन








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News 127, haridwar।

महर्षि दयानंद सरस्वती के प्रिय शिष्य पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी की जयंती पर वैदिक ज्ञान, संस्कृति और नैतिक मूल्यों का प्रेरक संगम दिनांक 5 मई 2026 को डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल,जगजीतपुर, कनखल,हरिद्वार में आर्य समाज वैदिक धर्म प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी आयोजन हिंदी एवं नैतिक शिक्षा विभाग द्वारा किया गया।
कार्यक्रम आर्य प्रादेशिक प्रतिनिधि सभा के प्रेरणास्रोत एवं डीएवी संस्थाओं के माननीय अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. पूनम सूरी जी के आदर्श मार्गदर्शन के अनुरूप विद्यालय प्रधानाचार्य मनोज कुमार कपिल के कुशल नेतृत्व में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का संचालन धर्म शिक्षिका डॉ.अनीता स्नातिका, मिडल विंग हिंदी की समन्वयिका मीना डबराल,हिंदी शिक्षिका अनिता भंडारी एवं शिक्षक नवनीत बलोदी के संरक्षण और संयोजन में व्यवस्थित ढंग से किया गया। इस प्रतियोगिता में कक्षा सातवीं एवं आठवीं के विद्यार्थियों को चार समूहों में विभाजित कर सहभागिता कराई गई , विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, वैदिक ज्ञान और टीम भावना का समावेश देखने को मिला। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों से वेद,आर्य समाज के सिद्धांत, डीएवी आंदोलन,महान क्रांतिकारी व स्वतंत्रता सेनानी,आर्य समाज के महापुरुषों का समाज,देश व मानवता के लिए योगदान तथा भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों से संबंधित विविध प्रश्न पूछे गए। प्रतिभागियों ने आत्मविश्वास, ज्ञान और उत्साह के साथ उत्तर देकर अपनी वैदिक समझ का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य मनोज कुमार कपिल ने अपने प्रेरणास्पद उद्बोधन में कहा—
“विद्यालय केवल पुस्तकीय ज्ञान का केंद्र नहीं,बल्कि संस्कार,चरित्र और राष्ट्र निर्माण की प्रथम पाठशाला है। वैदिक शिक्षा हमें सत्य,अनुशासन और मानवता का मार्ग दिखाती है।”
उन्होंने विद्यार्थियों को पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी के जीवन से प्रेरणा लेते हुए ज्ञान, विनम्रता और राष्ट्रसेवा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
पद्मश्री डॉ. पूनम सूरी जी के संदेश को साझा करते हुए विद्यार्थियों को बताया गया—
“डीएवी संस्थाओं का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि वैदिक आदर्शों से युक्त ऐसे नागरिक तैयार करना है जो समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें।”
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि- “आर्य युवा समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री योगी सूरी जी का एक ही आह्वान है कि इस संस्था में पढ़ने वाले प्रत्येक छात्र और छात्रा को अपनी खोई हुई वैदिक संस्कृति और संस्कारों को पुन: जानना और उस पर आचरण करना आवश्यक है तभी हम सच्चे अर्थों में श्रेष्ठ मानव बन सकते हैं।”
उनका यह संदेश विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।
धर्म शिक्षिका डॉ.अनीता स्नातिका ने कहा—“वेदों का ज्ञान जीवन को प्रकाशमान करता है। जो विद्यार्थी अपने धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों को समझता है, वही वास्तविक अर्थों में शिक्षित कहलाता है।”
उन्होंने पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी के जीवन को समर्पण, विद्वता और वैदिक निष्ठा का अनुपम उदाहरण बताया।
उन्होंने विद्यार्थियों को सत्यार्थ, सदाचार और भारतीय संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों के भीतर वैदिक धर्म के प्रति श्रद्धा, जिज्ञासा और जागरूकता को और अधिक सुदृढ़ किया।
समापन अवसर पर विजेता समूहों को सम्मानित किया गया । यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि वैदिक संस्कृति, नैतिक शिक्षा और भारतीय आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ।
आर्य समाज: वैदिक धर्म प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का परिणाम इस प्रकार से रहा-
क्रम संख्या समूह प्रतिभागी/कक्षा/वर्ग स्थान/ उपलब्धि
1 स्वामी दयानंद सरस्वती श्रेयांश कंसल, वेदिका चौहान (8ए),
सात्विक मैथाणी, रूद्रांश भण्डारी (8बी), हर्शिवअरोड़ा, स्वास्तिका मलिक (8सी) तृतीय
2 महात्मा हंसराज आनंदवर्धन धीमान, समृद्ध आनंद (8डी), निशरिता सतपथी, पलक सिंह (8ई), दैविक नेगी, पार्थ बडोला (8एफ) चतुर्थ (प्रोत्साहन/ सांत्वना)
3 पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी कनिष्का सैनी, रणवीर सिकरोरिया(7ए),
आदि देव, अक्षित सैनी (7बी),
आराध्य कुमार, प्रज्ञा मिश्रा (7सी) प्रथम
4 महात्मा आनंद स्वामी अथर्व चौहान, नकुल अरोड़ा (7डी),
वसुधा उपाध्याय, वैभव त्यागी (7ई),
आद्या वर्मा, लावण्या अत्रिया (7एफ) द्वितीय