- भारतीय सैनिकों को कृषि विश्वविद्यालय में दिया गया जैव नियंत्रण एजेंट उत्पादन का 21 दिवसीय प्रशिक्षण
न्यूज 127. मेरठ।
भारतीय सैनिको के लिए कृषि विश्वविद्यालय मोदीपुरम में चल रहे 21 दिवसीय प्रशिक्षण जैव-नियंत्रण एजेंटों के बडे़ पैमाने पर उत्पादन कार्यक्रम का समापन हो गया। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर डॉ. वी.पी. सिंह, निदेश प्रसार डॉ. सतेन्द्र कुमार, कृषि अधिष्ठाता डॉ. विवेक धामा ने कार्यक्रम का समापन संयुक्त रूप से किया।

इस अवसर पर प्रोफेसर डॉ. वी.पी. सिंह, कुलसचिव, ने अपने सम्बोधन में जैविक नियंत्रण की उपयोगिता पर बल देते हुये बताया कि जैविक प्रतिनिधियों के उपयोग से वातावरण, जलवायु, मृदा एवं कृषि उत्पाद पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने यह भी बताया की जैविक प्रतिनिधियों के विस्तार से प्रशिक्षणर्थियों को अवगत कराना आवश्यक है, जिससे वह स्वयं उपयोग करने के साथ-साथ अपने क्षेत्र में एवं बड़े पैमाने पर उत्पादित कर लोगों को पूर्ति कराना सुनिश्चित कर सकें।

इस अवसर पर डॉ. सतेन्द्र कुमार निदेशक प्रसार ने, अपने सम्बोधन में इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जैविक प्रतिनिधियों के इतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुये बताया कि जैविक प्रतिनिधि हमारे लिये बहुत ही उपयोगी है और इनका इस्तेमाल किया जाना, रसायनों के इस्तेमाल को कम करने एवं इनके दुष्प्रभाव से बचने के लिए नितान्त आवश्यक है।

इस अवसर पर डॉ. विवेक अधिष्ठाता कृषि ने सभी अतिथियों एवं संकाय सदस्यों का स्वागत् करते हुए प्रशिक्षण के महत्ता पर बल देते हुऐ बताया कि कीटनाशियों का इस्तमाल अन्धाधुन्ध तरीके से किया जाता है। इसे दृष्टिगत रखते हुए इस प्रकार के जैव प्रतिनिधियों का उत्पादन एवं उपयोग किया जाना अवश्यक है।

इस अवसर पर पाठयक्रम निर्देशक डॉ. राजेन्द्र सिंह ने समापन अवसर पर व्यहारिक ज्ञान उत्पान तकनीकों एवं उनके कृषि के क्षेत्र में महत्व के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष कीट विज्ञान, डॉ. डी0 वी0 सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा सभी प्रतिभागियों को गुणवत्ता पूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने पर धन्यवाद दिया। इस अवसर पर डॉ. गजे सिंह, आकाश सिंह, विक्रान्त, अमोल, कीर्ति पाल, अनुराग एवं विभाग के समस्त छात्र-छात्रायें उपस्थित रहे।




