पथ प्रवाह, देहरादून।
डीएवी पब्लिक स्कूल, देहरादून में मातृ दिवस अत्यंत हर्ष, उल्लास और भावनात्मक गरिमा के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर विद्यालय प्रांगण को रंग-बिरंगी झालरों एवं आकर्षक सजावट से सुसज्जित किया गया, जिससे वातावरण पूरी तरह उत्सवमय हो उठा।

कार्यक्रम का मूल उद्देश्य माँ के प्रति सम्मान, प्रेम, कृतज्ञता तथा उनके अद्वितीय त्याग के प्रति आभार व्यक्त करना रहा। इस अवसर ने एक बार पुनः यह स्मरण कराया कि माँ ही हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं, जो अपने स्नेह, संस्कार और समर्पण से हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण एवं पवित्र हवन के साथ हुआ। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में कक्षा नर्सरी से यूकेजी तक के नन्हे विद्यार्थियों ने अपनी माताओं के साथ संयुक्त रूप से आहुतियाँ अर्पित कीं। इस भावपूर्ण दृश्य ने उपस्थित सभी जनों को भाव-विभोर कर दिया। यज्ञ में सहभागिता कर माताओं ने स्वयं को गौरवान्वित एवं आत्मिक रूप से समृद्ध अनुभव किया।

इसके उपरांत विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी माताओं के प्रति प्रेम और आभार व्यक्त किया। गीत और नृत्य प्रस्तुतियों ने समारोह में जीवंतता और उत्साह का संचार कर दिया, जिससे पूरा वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रधानाचार्या श्रीमती शालिनी समाधिया ने माताओं को संबोधित करते हुए कहा कि “माँ और बच्चे का संबंध संसार का सबसे पवित्र एवं निश्छल बंधन होता है।” उन्होंने माताओं से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों में वैदिक संस्कारों का बीजारोपण करें तथा उन्हें आत्मविश्वासी, सत्यभाषी और संस्कारित नागरिक बनने हेतु प्रेरित करें।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि बच्चों को वैदिक मंत्रों का अर्थ सहित ज्ञान कराया जाए, जिससे वे अपनी संस्कृति के मूल मर्म को समझ सकें। साथ ही उन्होंने मोबाइल के संयमित उपयोग पर बल देते हुए यथासंभव कीपैड फोन के उपयोग की सलाह दी। उन्होंने कहा कि माताएं अपने बच्चों के साथ अधिकाधिक गुणवत्तापूर्ण समय व्यतीत करें, जिससे बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखा जा सके और उनके समग्र विकास को दिशा मिल सके।
इस प्रेरणादायी एवं संस्कारपूर्ण आयोजन ने न केवल मातृ सम्मान की भावना को सुदृढ़ किया, बल्कि विद्यालय एवं परिवार के बीच भावनात्मक संबंधों को भी और अधिक मजबूत बनाने का कार्य किया।





