डीएवी पब्लिक स्कूल देहरादून में तीन दिवसीय शिक्षक-प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य शुभारंभ








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देहरादून
डीएवी पब्लिक स्कूल, देहरादून में तीन दिवसीय क्षमता संवर्धन शिक्षक-प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ उत्साह, ऊर्जा और सकारात्मक वातावरण के बीच किया गया। यह कार्यशाला 22 जून से 24 जून तक विद्यालय परिसर में आयोजित की जा रही है, जिसमें शिक्षकों के समग्र विकास एवं शिक्षण कौशल को उन्नत करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।

कार्यशाला का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती शालिनी समाधिया द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर परिवर्तन हो रहे हैं, और इन परिवर्तनों के अनुरूप स्वयं को अद्यतन रखना प्रत्येक शिक्षक की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कार्यशाला के आयोजन के लिए डीएवी कॉलेज मैनेजिंग कमेटी, नई दिल्ली के प्रधान पद्मश्री डॉ. पूनम सूरी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी कार्यशालाएं शिक्षकों को नई दिशा, नवीन दृष्टिकोण और आधुनिक शिक्षण तकनीकों से जोड़ने का कार्य करती हैं।

प्रधानाचार्या शालिनी समाधिया ने अपने संबोधन में कहा कि “सीखना एक सतत् प्रक्रिया है”, और इसी सोच को साकार करने हेतु डीएवी प्रबंधन द्वारा प्रतिवर्ष विभिन्न विद्यालयों में इस प्रकार की क्षमता संवर्धन कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। इनका मुख्य उद्देश्य शिक्षण प्रक्रिया को अधिक रोचक, प्रभावशाली एवं ज्ञानवर्धक बनाना है।

इस तीन दिवसीय कार्यशाला में उत्तराखंड ज़ोन के विभिन्न डीएवी विद्यालयों—हरिद्वार, रुद्रपुर, कोटद्वार, बाज़पुर एवं हल्द्वानी से आए मास्टर ट्रेनर्स एवं शिक्षक-शिक्षिकाएं सक्रिय रूप से प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यशाला के अंतर्गत हिंदी, संस्कृत, नैतिक शिक्षा, भौतिक विज्ञान तथा प्राथमिक कक्षाओं से जुड़े विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण विधियों, तकनीकी संसाधनों के उपयोग एवं प्रभावी कक्षा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया जा रहा है। साथ ही, उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से अपने कौशल को और अधिक परिष्कृत करने का अवसर भी प्राप्त हो रहा है।

प्रधानाचार्या शालिनी समाधिया ने अपने विचारों में यह भी कहा कि ऐसी कार्यशालाएं शिक्षकों के ज्ञान, कौशल और कार्यक्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाती हैं, जिससे वे न केवल अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर पाते हैं, बल्कि विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण एवं प्रेरणादायक शिक्षा प्रदान करने में सक्षम होते हैं।

कार्यशाला का आयोजन विद्यालय परिवार के लिए एक प्रेरणादायक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य में शिक्षा की गुणवत्ता को और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।