कड़ी मेहनत, नवाचार और सेवा भावना से विकसित भारत के निर्माण में दें योगदान:








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न्यूज 127, मेरठ
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ में सोमवार को 19वें दीक्षांत समारोह का भव्य एवं गरिमामय आयोजन सम्पन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने की। समारोह के मुख्य अतिथि गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष एवं बनास डेयरी के चेयरमैन शंकरभाई चौधरी तथा विशिष्ट अतिथि सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रपौत्र अतुल धीरजलाल पटेल, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही एवं राज्यमंत्री कृषि बलदेव सिंह औलख रहे।
समारोह में 450 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गईं। विभिन्न संकायों के मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया। बीवीएससी एवं एनिमल हसबैंड्री के छात्र आशुतोष शर्मा को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए चांसलर गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रायोजित स्वर्ण पदक, बेस्ट टीचर अवार्ड तथा आउटस्टैंडिंग वुमन टीचर अवार्ड भी प्रदान किए गए। वैक्सीनेशन में उत्कृष्ट कार्य करने पर बागपत के जिलाधिकारी व सीडीओ को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं बागपत की आंगनबाडी कार्यकर्त्रियो को बच्चों की कुर्सी, ट्राईसाईकिल, खिलौने, गिफ्ट आदि वितरित किये गए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और राष्ट्रसेवा के नए संकल्प का पर्व है। विद्यार्थियों के हाथों में पहुंचने वाली उपाधि उनके परिश्रम, गुरुजनों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के त्याग का सम्मान है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रखते हुए किसान, गांव, समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कृषि शिक्षा, पशुपालन, ग्रामीण उद्यमिता, खाद्य प्रसंस्करण, नवाचार एवं किसान कल्याण का सशक्त केंद्र है। शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार के माध्यम से किसानों, पशुपालकों, युवाओं एवं ग्रामीण महिलाओं तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने का विश्वविद्यालय का कार्य सराहनीय है।

राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत-2047 का लक्ष्य तभी साकार होगा जब युवा ज्ञान, विज्ञान, नवाचार, नैतिक मूल्यों और सेवा भावना को अपने जीवन का आधार बनाएंगे। आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल कृषि, स्टार्टअप, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा किसान कल्याण जैसे राष्ट्रीय संकल्पों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से कठिन परिश्रम, अनुशासन और नवाचार की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इसरो की तर्ज पर संस्थानों के बीच समन्वय एवं साझा अनुसंधान की संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। बनास डेयरी के माध्यम से प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को जोड़ने की पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने अधिकारियों से सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया।

राज्यपाल ने कहा कि अनेक महिलाएं औपचारिक शिक्षा प्राप्त न होने के बावजूद अपने परिश्रम और उद्यमिता के बल पर करोड़ों रुपये का व्यवसाय कर रही हैं। ऐसे प्रेरक उदाहरणों से सीख लेकर प्रत्येक व्यक्ति को कठिन परिश्रम और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि विविधीकरण एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर बल देते हुए सुझाव दिया कि दीक्षांत समारोह को ‘‘दीक्षोत्सव’’ के रूप में 15 दिनों तक आयोजित किया जाए, जिसमें किसानों, महिलाओं एवं ग्रामीण बच्चों को जोड़कर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएं।

मुख्य अतिथि शंकरभाई चौधरी ने कहा कि आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल कृषि किसानों की उत्पादकता बढ़ाने तथा आय में वृद्धि का प्रभावी माध्यम हैं। विशिष्ट अतिथि अतुल धीरजलाल पटेल ने विद्यार्थियों से नवाचार, सृजनात्मकता और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार कृषि अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन तकनीक, डिजिटल कृषि एवं कृषि स्टार्टअप के क्षेत्र में युवाओं के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध करा रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से केवल रोजगार प्राप्त करने तक स्वयं को सीमित न रखते हुए नवाचार आधारित उद्यमी एवं रोजगार सृजक बनने का आह्वान किया। राज्यमंत्री कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान बलदेव सिंह औलख ने कहा कि सच्चा ज्ञान वही है जो समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए समर्पित हो।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 133 करोड़ रुपये की विभिन्न आधारभूत संरचना विकास परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है। इस अवसर पर पतंजलि भारतीय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, हरिद्वार एवं विश्वविद्यालय के मध्य कृषि, आयुर्वेद तथा अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम का संचालन कुलसचिव डॉ. वी.पी. सिंह एवं प्रमिला उमराव ने किया।

इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सोमेन्द्र तोमर, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी, एमएलसी धर्मेन्द्र भारद्वाज, पूर्व सांसद राजेन्द्र अग्रवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान, जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडे सहित जनप्रतिनिधिगण, प्रबंध परिषद के सदस्य एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।