अंतर विद्यालय वैदिक संगीत प्रतियोगिता में दिखी परंपरा की पवित्रता और गहन साधना की स्पष्ट झलक








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पथ प्रवाह, देहरादून।
भारतीय संस्कृति और संस्कारों के संवाहक तथा आर्य समाज की वैदिक पंरपरा को विश्व पटल पर स्थापित करने वाले डीएवी काॅलेज मैनेजिंग कमेटी, नई दिल्ली के निर्देश पर डीएवी पब्लिक स्कूल, देहरादून में अंतर विद्यालय वैदिक संगीत प्रतियोगिता का सफल व भव्य आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य भारतीय वैदिक संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति व वैदिक परंपराओं से परिचित कराना था।

9 विद्यालयों ने लिया प्रतियोगिता में हिस्सा
इस सांस्कृतिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड संस्कृति, साहित्य एवं कला विभाग की उपाध्यक्षा मधु भट्ट जी की उपस्थिति ने समारोह की शोभा में चार चांँद लगा दिए। निर्णायक मंडल के रूप में अर्धशास्त्रीय, लाइट एवं बॉलीवुड गीतों, भजनों तथा ग़ज़लों के प्रमुख गायक शैलेंद्र कुमार सिंह, नंदिनी अरोड़ा और विनीता बच्छेती जी की उपस्थिति रही, जिन्हें सुरसाधक म्यूजिक अकादमी का स्वामित्व प्राप्त है। इस प्रतियोगिता में कुल 9 विद्यालयों ने उत्साहपूर्वक अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

दीप प्रज्वलन से हुई कार्यक्रम की शुरूआत
कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाचार्या शालिनी समाधिया ने मुख्य अतिथि व निर्णायक मंडल के साथ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन व पुष्पांजलि के साथ की। प्रज्वलित दीप की दिव्य आभा ने प्रांगण में उपस्थित प्रत्येक जन के हृदय को मानो इस आशा से आलोकित कर दिया कि यह वैदिक संगीत प्रतियोगिता न केवल सुरों की मधुर साधना का उत्सव बनेगी, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को भी नवीन ऊर्जा प्रदान करेगी।

स्वर साधना और मधुर आवाज का बिखरा जादू
अलग-अलग विद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने अपनी स्वर साधना और मधुर आवाज़ के जादू से संपूर्ण विद्यालय प्रांगण को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीत आत्मा की आवाज है, जो हृदय की गहराइयों से निकलकर सीधे परमात्मा तक पहुँचती है और आकाश की अनंत ऊँचाइयों में समाकर स्वयं को चरितार्थ कर देती है। प्रत्येक प्रस्तुति में वैदिक संगीत परंपरा की पवित्रता और गहन साधना की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी। उनके सुरों की मधुरता और लयबद्धता ने श्रोताओं के हृदय को गहराई से स्पर्श किया। ऐसी मनमोहक प्रस्तुतियों ने न केवल वातावरण को दिव्यता से भर दिया, बल्कि सभी को भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा पर गर्व करने के लिए प्रेरित भी किया।

मानव भारती इंडिया इंटरनेशल स्कूल रहा प्रथम
इस प्रतियोगिता की एक विशेष बात यह रही कि डीएवी पब्लिक स्कूल, देहरादून के विद्यार्थियों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति से सभी को प्रभावित किया, किंतु वे प्रतियोगिता में प्रतिभागी के रूप में सम्मिलित नहीं थे। इस प्रतियोगिता में ‘मानव भारती इंडिया इंटरनेशनल स्कूल’ ने प्रथम, विवेकानंद स्कूल’ ने द्वितीय व ‘द एशियन स्कूल’ ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

वैदिक संस्कृति के गायन हुआ सुखद अनुभव
मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि सभी प्रस्तुतियों ने हमारे हृदय को गौरवान्वित होने का अवसर प्रदान किया। वैदिक संस्कृति के गायन को सुनकर ऐसा अनुभव हुआ मानो आत्मा का परमात्मा से मिलन हो रहा हो। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार उन्होंने विदेशों में जाकर भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया, उसी प्रकार हम भी अपने बच्चों के हृदय रूपी भूमि में संस्कारों के बीज बोकर उन्हें एक विशाल वृक्ष के रूप में विकसित करने में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। अंत में उन्होंने विद्यालय द्वारा इस प्रकार के प्रेरणादायक कार्यक्रमों के सफल आयोजन तथा उनकी सकारात्मक सोच की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

प्रधानाचार्या ने जताया अतिथियों का आभार
कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्या शालिनी समाधिया ने उपस्थित समस्त गणमान्य जन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वैदिक संस्कृति को अपनाना और उसे विश्वभर में आकाश की ऊंँचाइयों तक ले जाना हमारा परम कर्तव्य है। हमारी संस्कृति हमें आत्मगौरव का भाव सिखाती है और विश्व पटल पर एक विशेष स्थान दिलाती है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपनी परंपराओं और मूल्यों को संजोते हुए नई पीढ़ी को उनसे परिचित कराना चाहिए, ताकि वे भी अपनी जड़ों से जुड़े रहें। यही हमारे उज्ज्वल भविष्य और सशक्त राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।