हरिद्वार
दिल्ली पब्लिक स्कूल, रानीपुर (हरिद्वार) में सीबीएसई उत्कृष्टता केंद्र, देहरादून के तत्वावधान में “विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को बढ़ावा” विषय पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का सफल एवं प्रभावशाली आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड एवं गुजरात सहित विभिन्न राज्यों से आए लगभग 80 शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर अपने ज्ञान और अनुभव को समृद्ध किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. जितेंद्र नागपाल, विशिष्ट अतिथि मनीष कुमार त्यागी, डॉ. गीता मेहरोत्रा, विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अनुपम जग्गा तथा रिसोर्स पर्सन डॉ. नम्रता शर्मा एवं डॉ. नूतन बिष्ट द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत स्वागत गान ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक गरिमा का समावेश करते हुए सभी उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

प्रधानाचार्य डॉ. अनुपम जग्गा ने अपने स्वागत संबोधन में कार्यशाला के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों के समग्र विकास में मानसिक स्वास्थ्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यालयों में सकारात्मक, सहयोगात्मक एवं संवेदनशील वातावरण विकसित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

मुख्य अतिथि डॉ. जितेंद्र नागपाल ने अपने प्रेरक उद्बोधन में विद्यार्थियों में बढ़ते मानसिक तनाव, परीक्षा के दबाव एवं व्यवहारिक चुनौतियों पर गहन चर्चा की। उन्होंने कहा कि “विद्यालय के शिक्षक ही विद्यार्थियों के प्रथम काउंसलर होते हैं, इसलिए उनकी भूमिका और भी जिम्मेदार हो जाती है।”

वहीं, विशिष्ट अतिथि डॉ. गीता मेहरोत्रा ने शिक्षकों की भूमिका को विद्यार्थियों के मानसिक एवं भावनात्मक विकास का आधार बताते हुए उन्हें अधिक संवेदनशील और जागरूक बनने की प्रेरणा दी।

सीबीएसई सीओई देहरादून के जॉइंट डायरेक्टर एवं हेड तथा असिस्टेंट प्रोफेसर मनीष कुमार त्यागी ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों को विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को समझने और उनकी भावनात्मक आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनने की आवश्यकता है। उन्होंने “जीरो सुसाइड कंट्री” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यशाला के दौरान रिसोर्स पर्सन डॉ. नम्रता शर्मा एवं डॉ. नूतन बिष्ट द्वारा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत एवं व्यावहारिक सत्र लिए गए। इन सत्रों में तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, विद्यार्थियों की मनोवैज्ञानिक समस्याएं एवं सकारात्मक शिक्षण वातावरण जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई।
इस कार्यशाला ने प्रतिभागियों को न केवल मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाया, बल्कि उन्हें विद्यार्थियों के प्रति अधिक संवेदनशील एवं सहयोगी दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा भी दी। अंत में विद्यालय परिवार द्वारा सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।




