नवीन चौहान, हरिद्वार। बैंकों को फर्जी दस्तावेज देकर करोड़ों की चपत लगाने वाले हरिद्वार के नटवरलाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी विजय कुशवाहा ने बैंक ऑफ बडौदा की देहरादून शाखा से तीन करोड़ का लोन मंजूर कराया। लोन की एवज में जो संपत्ति बैंक को गिरवी रखी थी उसको किसी ओर को पूर्व में ही ब्रिकी कर दी थी। धोखाधड़ी के इस प्रकरण में आरोपी की पत्नी भी नामजद है।
जांच अधिकारी उप निरीक्षक गजेंद्र यादव ने बताया कि ज्वालापुर कोतवाली में 26 अक्टूबर 2017 को शारदा नगर निवासी सुरेंद्र सिंह पुत्र अमर सिंह ने विजय कुशवाहा और उसकी पत्नी रेखा कुशवाहा के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। तहरीर में बताया कि सुरेंद्र ने एक दुकान विजय कुशवाहा से खरीद की गई। जिसकी रजिस्ट्री 25 सितंबर 2007 को सुरेंद्र ने करा ली। इसी दौरान विजय कुशवाहा ने अपनी पत्नी रेखा कुशवाहा के नाम पर देहरादून की बल्लूपुर बैंक ऑफ बडौदा की शाखा से 5 नवंबर 2011 को तीन करोड़ का लोन मंजूर करा लिया। सुरेंद्र को बैंक से नोटिस आया तो पता चला कि उसकी दुकान पर तीन करोड़ का लोन है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना की और पर्याप्त साक्ष्य जुटाये। तमाम सबूतों को जुटाने के बाद पुलिस ने आरोपी विजय कुशवाहा को गिरफ्तार कर लिया है।
तीन करोड़ के लोन पर किये मजे
आरोपी विजय कुशवाहा ने 23 अगस्त 2005 को उक्त दुकान किसी प्रतिभा कुमार से खरीद की थी। इसी पहली रजिस्ट्री को बैंक को गिरवी रख दिया। जबकि उक्त दुकान 25 सितंबर2007 को सुरेंद्र को बेच दी। सुरेंद्र अपनी रजिस्ट्री को संभाल कर रखे हुआ था। जबकि इसी दुकान की पहली रजिस्ट्री पर तीन करोड़ का लोन कराकर विजय कुशवाहा मजे लूट रहा था।
बैंक प्रबंधकों की भूमिका संदिग्ध
तीन करोड़ का लोन मंजूर करने में बैंक प्रबंधकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आखिरकार जिस दुकान की ब्रिकी हो चुकी है। इस संपत्ति की जांच बैंक ने कैसे नहीं की। लोन मंजूर करने से पूर्व बैंक के वकील संपत्ति की पूरी छानबीन करते है। ऐसे में तीन करोड़ की बड़ी रकम देने में बैंक की लापरवाही साफ झलक रही है।
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