न्यूज 127, मेरठ।
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ में उत्तर प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. एम.के. शन्मुगा सुन्दरम ने विश्वविद्यालय के कुलपति सभागार में निदेशकों, अधिष्ठाताओं और विभागाध्यक्षों के साथ एक उच्चस्तरीय संवाद बैठक की। बैठक के दौरान उन्होंने संस्थान में चल रही शिक्षा, शोध और कृषि प्रसार गतिविधियों की प्रगति की बारीकी से समीक्षा की। इस अवसर पर कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे नवाचारों और आगामी कार्ययोजनाओं से प्रमुख सचिव को अवगत कराया।
समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव डॉ. एम.के. शन्मुगा सुन्दरम ने कहा कि वर्ष 1965 में देश में हरित क्रांति के सूत्रपात के बाद पीली, सफेद और नीली क्रांति ने भारत की खाद्यान्न सुरक्षा को अभूतपूर्व मजबूती दी है। उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1947 में देश का खाद्यान्न उत्पादन महज 50 मिलियन टन था, जो अब बढ़कर 376 मिलियन टन पहुंच चुका है और आने वाले वर्षों में इसमें और अधिक बढ़ोतरी की उम्मीद है। अकेले उत्तर प्रदेश में 74 मिलियन टन खाद्यान्न का उत्पादन होता है, जिसे भविष्य में और बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
प्रमुख सचिव ने विशेष रूप से चिंता जताते हुए कहा कि आज कृषि क्षेत्र के सामने ‘खेत बचाओ अभियान’ पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने वैज्ञानिकों और शोधार्थियों का आह्वान किया कि वे मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ाने के लिए नई तकनीकें विकसित करें। इसके लिए खेती में दलहनी फसलों, ढैंचा और हरी खाद के समावेश पर जोर देना होगा, ताकि मृदा की उर्वरता सुरक्षित रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो उपजाऊ जमीन धीरे-धीरे बंजर भूमि में तब्दील हो सकती है।
बैठक के अंत में उन्होंने घोषणा की कि आगामी दिसंबर माह में लखनऊ में ‘कार्बन कंटेंट’ (मृदा में कार्बन की मात्रा) को लेकर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा, जिससे प्रदेश के वैज्ञानिक, शोध छात्र और किसान प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो सकेंगे।


