बदरी-केदरानाथ मंदिर समिति का बदलेगा नाम, सरकार लेगी अंतिम निर्णय ?








Listen to this article

न्यूज 127, देहरादून।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) का नाम बदलकर “श्री बदरीनाथ श्री केदारनाथ प्रबंधन बोर्ड” करने का प्रस्ताव हाल ही में तैयार किया गया है, जिस पर अंतिम निर्णय उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा लिया जाना बाकी है।

प्रशासनिक और नीतिगत बदलाव से जुड़े मुख्य बिंदु:—

नया नामकरण: वर्तमान ‘बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति’ (BKTC) का नाम बदलकर “श्री बदरीनाथ श्री केदारनाथ प्रबंधन बोर्ड” रखने का सुझाव दिया गया है।

कार्यकाल में विस्तार: इस नए प्रस्ताव में समिति के वर्तमान 3 वर्ष के कार्यकाल को बढ़ाकर 5 वर्ष करने की सिफारिश की गई है।

मुख्य उद्देश्य: कार्यकाल बढ़ने से बोर्ड को दीर्घकालिक योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

अंतिम निर्णय: मंदिर समिति के वर्तमान अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के स्तर से यह चर्चा सामने आई है, लेकिन इस पर कानूनन मुहर लगाने का अंतिम अधिकार पूरी तरह राज्य सरकार और संबंधित वैधानिक प्राधिकरणों के पास सुरक्षित है।

पिछला इतिहास: इससे पहले उत्तराखंड की तत्कालीन त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने सभी चारधामों के लिए ‘देवस्थानम बोर्ड’ का गठन किया था। हालांकि, तीर्थ पुरोहितों और धार्मिक संगठनों के भारी विरोध के कारण वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने उसे भंग कर पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी थी।

मूल अधिनियम: वर्तमान व्यवस्था वर्ष 1939 के बदरीनाथ-केदारनाथ अधिनियम। जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा 1939 में ‘श्री बदरीनाथ अधिनियम’ के रूप में एक राजपत्र अधिसूचना प्रस्तुत की गई एवं कुछ समयोपरान्त श्री केदारनाथ मन्दिर भी उक्त अधिनियम मे समलित कर ‘श्री बदरीनाथ केदारनाथ मन्दिर समिति’ का गठन हुआ।

श्री बदरीनाथ मंदिर समिति, संस्कृत भाषा के उन्नयन हेतु सात संस्कृत विद्यालयों का संचालन करती है जिनमें छात्रों को निशुल्क छात्रावास एवं छात्रवृति की सुविधा भी उपलब्ध है साथ ही एक आयुर्वेदिक फार्मेसी विद्यालय जो कि गुप्तकाशी (विद्यापीठ) में स्थित है का भी संचालन करती है । श्री बदरीनाथ – श्री केदारनाथ मंदिर समिति 45 अन्य अधिनस्थ मंदिरों और 20 धर्मशालाओं का रखरखाव करती है जो कि श्री बदरीनाथ एवं श्री केदारनाथ यात्रा मार्ग में स्थित हैं।

श्री केदारनाथ मन्दिर, बारह प्रतिष्ठित ज्योतिर्लिंगों में से सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित भगवान शिव को समर्पित ज्योतिर्लिंग है। जहां महाभारत में जीत के बाद पांडवों ने युद्ध में गोत्र हत्या के पाप से मुक्ति के लिए भगवान शिव की पूजा कर दर्शन प्राप्त किये थे। श्री बदरीनाथ मन्दिर आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार धामों में सबसे बड़ा महत्व रखते हैं एवं इस स्थान को एकमात्र मोक्ष धाम माना गया है।

अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के कथित प्रस्तावों को लेकर एक बार फिर धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पत्र में दावा किया जा रहा है कि दोनों प्रस्ताव शासन की मंजूरी के लिए भेजे गए हैं, लेकिन इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक दस्तावेज या पुष्टि सार्वजनिक नहीं की गई है। गौरतलब है कि वायरल हो रहे पत्र की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसमें किए गए दावों को अंतिम या आधिकारिक निर्णय नहीं माना जा सकता। शासन अथवा बीकेटीसी की ओर से आधिकारिक बयान आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।