स्वाति नक्षत्र और दुर्लभ योगों के महासंयोग के साथ 8 नवंबर को मनाई जाएगी मुख्य दीपावली, जानें पूजा के शुभ मुहूर्त




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न्यूज 127, Meerut:
धनतेरस के पावन पर्व के साथ इस बार दीपावली का पांच दिवसीय महापर्व आरंभ हो चुका है। हालांकि, इस बार अमावस्या तिथि बढ़ने के कारण यह पर्व कुल 6 दिनों का रहेगा। वास्तु एवं ज्योतिष सलाहकार राहुल अग्रवाल के मुताबिक ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस वर्ष दीपावली पर कई दुर्लभ और विशेष योगों का निर्माण हो रहा है, जो इसे बेहद फलदायी बना रहे हैं। मुख्य दीपावली का यह महापर्व 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा।

प्रमुख पर्वों की तिथियां:
6 नवंबर (शुक्रवार): धनतेरस
7 नवंबर (शनिवार): छोटी दीपावली (नरक चतुर्दशी, हनुमान पूजा व अभ्यंग स्नान)
8 नवंबर (रविवार): मुख्य दीपावली (लक्ष्मी-गणेश पूजन)
9 नवंबर (सोमवार): अमावस्या तिथि का स्नान और दान
10 नवंबर (मंगलवार): गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट भोग
11 नवंबर (बुधवार): भैया दूज (बुधवार के दिन होने से इस पर्व का महत्व और अधिक बढ़ गया है)

दीपावली पर बन रहे विशेष योग:
ज्योतिष शास्त्र के जानकारों के अनुसार, 8 नवंबर को सूर्योदय के साथ ही स्वाति नक्षत्र शुरू हो जाएगा जो पूरे दिन-रात रहेगा। इसके साथ ही आयुष्मान और सौभाग्य योग का विशेष संयोग भी पूरे दिन-रात बना रहेगा। तुला राशि में सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग का निर्माण इस पर्व के महत्व को और अधिक बढ़ा रहा है। इस दिन माता महालक्ष्मी, मां सरस्वती, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की संयुक्त पूजा की जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री राम के अयोध्या लौटने की खुशी में दीप जलाए गए थे।

पूजा के लिए विशेष शुभ मुहूर्त:
व्यापारी वर्ग के लिए (ऑफिस, दुकान व फैक्ट्री हेतु):
दोपहर 1:14 बजे से दोपहर 2:42 बजे तक (स्थिर लग्न कुंभ एवं शुभ की चौघड़िया के बीच) पूजन का उत्तम मुहूर्त है।

गृहस्थों के लिए (सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त):
शाम 5:51 बजे से शाम 7:47 बजे तक प्रदोष काल में स्थिर लग्न वृषभ में गणेश-लक्ष्मी जी की पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय है। मान्यता है कि इस दौरान पूजन करने से मां लक्ष्मी घर में स्थायी रूप सेि निवास करती हैं।

निशीथ काल एवं तांत्रिक/विशेष पूजा के लिए:
निशीथ काल रात्रि 11:32 बजे से शुरू होगा। इसके कुछ ही देर बाद रात्रि 12:20 बजे से देर रात्रि 2:38 बजे तक स्थिर लग्न सिंह रहेगा। यह समय हर प्रकार की विशेष पूजा, आराधना और मंत्र जाप के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दीपावली (7 नवंबर) के दिन सुबह हनुमान जी की ज्योत जलाने, पूजा करने और अभ्यंग स्नान की परंपरा है, जबकि शाम को दीपदान किया जाता है।