जंतर-मंतर के प्रदर्शनों से युवा संत भी हो रहे प्रभावित, सनातन संस्थाओं की मर्यादा और अनुशासन बनाए रखना जरूरी
पथ प्रवाह, नवीन चौहान
देशभर में जेन-जी (जनरेशन जेड) आंदोलनों की बढ़ती चर्चा के बीच अब अखाड़ों में भी इसकी आहट सुनाई देने लगी है। युवा संतों के बीच विरोध-प्रदर्शनों को लेकर बढ़ती उत्सुकता और इनसे प्रभावित होने की प्रवृत्ति ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महाराज की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर सहित विभिन्न स्थानों पर हो रहे प्रदर्शनों को देखकर युवा संतों के मन में भी अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए इसी तरह के कदम उठाने का विचार आ सकता है। सनातन परंपरा से जुड़ी संस्थाओं में ऐसी प्रवृत्ति को लेकर उन्होंने गंभीर चिंता जताई है।
महंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि अखाड़े सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं, अनुशासन और मर्यादा के प्रतीक हैं। यहां परंपराओं के संरक्षण के साथ ही संतों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन दिया जाता है। ऐसे में जेन-जी आंदोलनों का प्रभाव युवा संतों तक पहुंचना विचारणीय विषय है। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा और उत्साह को नकारने के बजाय उसे सही दिशा देना जरूरी है, ताकि वे किसी भी गतिविधि से प्रभावित होकर अपनी परंपराओं और जिम्मेदारियों से विमुख न हों।
जंतर-मंतर के प्रदर्शन देखकर युवा संतों में भी उठ रहे सवाल
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि जब युवा देशभर में आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को देखते हैं तो उनके मन में भी यह सवाल उठ सकता है कि वे अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए क्या करें। युवा संतों में भी ऐसी उत्सुकता पैदा होना स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि हर परिस्थिति में विरोध-प्रदर्शन ही समाधान नहीं होता। अपनी बात रखने के लिए संवाद, अनुशासन और परंपराओं के अनुरूप रास्ते भी अपनाए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि साधु-संतों की संस्थाओं में मर्यादा और वरिष्ठों के प्रति सम्मान का विशेष महत्व है। असहमति होने पर भी बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। अखाड़ों की परंपराओं और उनकी गरिमा को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर जताई युवाओं के भविष्य की चिंता
महंत रविंद्र पुरी महाराज ने जेन-जी आंदोलनों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर युवाओं के भविष्य पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि युवाओं को भटकाव से बचाने के लिए समय रहते उचित कदम उठाए जाने चाहिए। सरकार और सामाजिक संगठनों को युवाओं की बात सुननी चाहिए तथा उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं। उनकी ऊर्जा का उपयोग राष्ट्र निर्माण और सामाजिक विकास में होना चाहिए। युवाओं को केवल कानून के डर से शांत करने के बजाय उनकी समस्याओं को समझना, उनसे संवाद करना और उन्हें उचित मार्गदर्शन देना अधिक महत्वपूर्ण है।
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं को भी दी नसीहत
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविंद्र पुरी महाराज ने राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेताओं से भी युवाओं के मुद्दे पर जिम्मेदारी से भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश, लोकतांत्रिक व्यवस्था और संस्थाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए ही राजनीतिक गतिविधियां होनी चाहिए। नेताओं को ऐसा माहौल बनाने से बचना चाहिए, जिससे युवा अपनी ऊर्जा टकराव में खर्च करने लगें।
उन्होंने आशंका जताई कि कुछ संगठन युवाओं को उकसाने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे में युवाओं को किसी के प्रभाव में आने के बजाय अपने विवेक से निर्णय लेना चाहिए। जेन-जी के समर्थन में आने वाले संगठनों की भी जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को सही दिशा और मार्गदर्शन दें।
कठोर कानून से अधिक जरूरी संवाद और मार्गदर्शन
महंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि जेन-जी से जुड़े विवादों का समाधान सरकार को बातचीत के माध्यम से निकालना चाहिए। युवा पीढ़ी की समस्याओं और अपेक्षाओं को समझकर उन्हें भरोसे में लेना जरूरी है। उन्होंने देश में कठोर कानून बनाए जाने की आवश्यकता पर भी अपनी राय रखी, लेकिन साथ ही युवाओं को समझाने, शांत करने और सही दिशा दिखाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि युवाओं का बड़ों और व्यवस्थाओं के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाना चिंता का विषय है। हालांकि, इस स्थिति का स्थायी समाधान संवाद, सहयोग और मार्गदर्शन से ही निकलेगा। अखाड़ों सहित सभी सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं को भी युवाओं को उनकी जिम्मेदारियों का एहसास कराना चाहिए।
महंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि जेन-जी देश की ताकत और भविष्य है। आवश्यकता इस बात की है कि युवा अपनी ऊर्जा का उपयोग सकारात्मक बदलाव के लिए करें। सनातन परंपराओं की गरिमा बनाए रखते हुए अपनी बात रखना और देश की संस्थाओं का सम्मान करना ही आगे बढ़ने का उचित मार्ग है।


