भारत, इटली और फ्रांस में गृह युद्ध जैसी परिस्थितियां बनने की जतायी आशंका
न्यूज 127, हरिद्वार।
प्रख्यात ज्योतिषविद् एवं शिक्षाविद् डॉ. पवन सिन्हा ने कहा कि वर्ष 2032 तक विश्व युद्ध की संभावना नहीं है, हालांकि कुछ देशों में संघर्ष जारी रह सकते हैं। उन्होंने भारत, इटली और फ्रांस में गृह युद्ध जैसी परिस्थितियां बनने की आशंका जताते हुए भारत के सामने आर्थिक कठिनाइयों और सामाजिक विघटन की चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए आर्थिक रूप से मजबूत बनने के साथ सामाजिक समरसता बनाए रखने पर ध्यान देना होगा।
हरिद्वार स्थित जगतगुरु आश्रम में जगतगुरु पारमार्थिक न्यास की ओर से आयोजित विश्व युद्ध की संभावनाओं पर ज्योतिष चिंतन कार्यक्रम में डॉ. पवन सिन्हा ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विश्व इतिहास में तीन हजार से अधिक युद्ध हो चुके हैं। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच देशों को दूरदर्शिता के साथ अपनी रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है।
विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करे भारत
डॉ. पवन सिन्हा ने कहा कि भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनने के लिए अपनी क्षमताओं और संसाधनों का बेहतर उपयोग करना होगा। विदेशी तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता उचित नहीं है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को यह समझना होगा कि विदेशी तकनीक का इस्तेमाल देश के हित में हो रहा है या भारत केवल दूसरे देशों की तकनीक के लिए संसाधन और बाजार उपलब्ध कराने तक सीमित रह जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीक को अपनाने से पहले उसके प्रभावों का आकलन जरूरी है। भारत को अपनी जरूरतों के अनुरूप तकनीकी विकास और आत्मनिर्भरता पर जोर देना चाहिए।
सामाजिक विघटन और पर्यावरण की चिंता
डॉ. पवन सिन्हा ने भारत में सामुदायिक और सामाजिक विघटन की आशंका जताते हुए कहा कि देश को सामाजिक संतुलन बनाए रखने के साथ प्रकृति की रक्षा पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि विकास की दौड़ में पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आने वाले समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए समाज और व्यवस्था को सजग रहना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक भविष्य के संदर्भ में उन्होंने परिवर्तन का योग बनने की बात भी कही। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने अपने ज्योतिषीय आकलन के आधार पर विचार व्यक्त किए।
जेन जी को सही मार्गदर्शन देने की जरूरत
नई पीढ़ी की भूमिका पर जोर देते हुए डॉ. पवन सिन्हा ने कहा कि जेन जी में सकारात्मक बदलाव लाने की अपार क्षमता है। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और शहीद भगत सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि युवाओं ने हमेशा देश और समाज को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को सही मार्गदर्शन देने की जरूरत है। परिवारों में युवाओं की जिज्ञासाओं और समस्याओं को समझने की क्षमता विकसित करनी होगी। वहीं, आश्रमों और शिक्षण संस्थानों को भी नई पीढ़ी से जुड़कर उसे जीवनोपयोगी ज्ञान और सकारात्मक दिशा देने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जेन जी की ऊर्जा का सही उपयोग देश के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
विश्व गुरु बनने के लिए अभी लंबा रास्ता
भारत के विश्व गुरु बनने की अवधारणा पर डॉ. पवन सिन्हा ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को अभी लंबा रास्ता तय करना है। उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों में भारत को विश्व गुरु कहना अतिशयोक्ति बताया। उनके अनुसार, आर्थिक मजबूती, तकनीकी आत्मनिर्भरता, सामाजिक समरसता और युवा शक्ति का सदुपयोग देश की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।


