जीएसटी काउंसिल का बड़ा फैसला, पांच करोड़ तक की कर चोरी पर आपराधिक मुकदमा नहीं




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17 दिन में रिफंड का लक्ष्य, फर्जी पंजीकरण पर बायोमेट्रिक सत्यापन से कसेगा शिकंजा

न्यूज 127, नई दिल्ली।
57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में कारोबारियों और करदाताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुधारों पर सहमति बनी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई बैठक में जीएसटी व्यवस्था को सरल बनाने और कर प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम फैसले लिए गए। सरकार ने जीएसटी व्यवस्था में प्रक्रियात्मक बदलावों के जरिए कारोबारियों को राहत देने का संकेत दिया है।

बैठक में सबसे अहम फैसला जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति समाप्त करने से जुड़ा रहा। इसके अलावा जीएसटी कानून के तहत आपराधिक अभियोजन की सीमा को बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये किए जाने पर सहमति बनी है। अब पांच करोड़ रुपये तक की कर चोरी के मामलों में आपराधिक मुकदमे की कार्रवाई नहीं होगी। इससे छोटे और मध्यम कारोबारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

17 दिन में रिफंड देने की तैयारी
कारोबारियों के लिए अटके हुए जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया को भी तेज करने का फैसला किया गया है। नई व्यवस्था में रिफंड आवेदन को अधिकतम 10 दिन में स्वीकार करने और इसके बाद सात दिन में राशि जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। इस तरह पूरी प्रक्रिया करीब 17 दिन में पूरी करने की तैयारी है। करीब 90 प्रतिशत रिफंड को तेजी से जारी करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है।

ईमानदार खरीदारों के ITC पर अभी फैसला बाकी
आपूर्तिकर्ता द्वारा कर जमा नहीं करने की स्थिति में ईमानदार खरीदार के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) को सुरक्षित रखने के प्रस्ताव पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इस मुद्दे को आगे विचार के लिए समिति को भेजा गया है। समिति इस संबंध में उचित व्यवस्था का सुझाव देगी।

फर्जी जीएसटी पंजीकरण पर बायोमेट्रिक पहरा
फर्जी कंपनियों और फर्जी जीएसटी पंजीकरण के जरिए होने वाली कर चोरी पर रोक लगाने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन को व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में कदम उठाया गया है। इससे फर्जी पहचान के आधार पर पंजीकरण कराने वालों पर शिकंजा कसने की उम्मीद है।