न्यूज 127, हरिद्वार।
कनखल स्थित अवधूत जगतराम उदासीन आश्रम की साध्वी सुदेश मुनि उदासीन (65) के ब्रह्मलीन होने पर संत समाज और श्रद्धालुओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उनके ब्रह्मलीन होने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में संत-महात्मा और श्रद्धालु आश्रम पहुंचे और उनके अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके उपरांत, पूरे विधि-विधान के साथ कनखल श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
इस अवसर पर आश्रम संचालक स्वामी सुतीक्ष्ण मुनि और संत जगजीत सिंह शास्त्री ने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि साध्वी सुदेश मुनि पिछले लगभग 40 वर्षों से इस आश्रम से जुड़ी हुई थीं। उनके द्वारा किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठानों और जनसेवा के कार्यों के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी श्रद्धालुओं के मन में उनके प्रति गहरी आस्था थी।
युवा भारत साधु समाज के महामंत्री स्वामी रवि देव शास्त्री और नया उदासीन अखाड़ा के कोठारी महंत नितिन दास ने कहा कि संतों का संपूर्ण जीवन समाज सेवा में ही व्यतीत होता है। ब्रह्मलीन साध्वी सुदेश मुनि ने सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार करने में अपना अहम योगदान दिया, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके इस तरह प्रस्थान से सभी अनुयायियों में शोक की लहर है।
इस दौरान बहन स्नेहलता पाठक, महामंडलेश्वर स्वामी कपिल मुनि, स्वामी नामदेव मुनि, महंत सत्यप्रकाश, महंत गंगादास, स्वामी हरिहरानंद, बाबा मोहन सिंह, बाबा तीरथ सिंह, साध्वी सुखजीत सरस्वती, साध्वी तृप्ता सरस्वती और स्वामी कैलाश मुनि सहित तमाम गणमान्य संत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।


