लोक संस्कृति हमारी आत्मा और पहचान, संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध: धामी






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न्यूज 127, देहरादून।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति केवल हमारी विरासत नहीं, बल्कि हमारी आत्मा और पहचान है। लोकभाषाओं, लोककलाओं, साहित्य और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री बुधवार को सोशल बलूनी स्कूल, हरिद्वार बाईपास, देहरादून में लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिवस पर आयोजित ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान समारोह’ में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों के अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित पुस्तक ‘माउंटेन मेलोडीज ऑफ नरेंद्र सिंह नेगी’ का विमोचन किया। समारोह में अरुणाचल प्रदेश के प्रख्यात अभिनेता, रंगकर्मी एवं नाटककार ताई तुगुंग को ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने नरेंद्र सिंह नेगी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि नेगी ने अपने गीतों और संगीत के माध्यम से उत्तराखंड के जनजीवन, प्रकृति, संघर्ष, संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को स्वर देकर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट स्थान दिलाया है।

अरुणाचल की संस्कृति को पहचान दिलाने में ताई तुगुंग का योगदान
ताई तुगुंग को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने न्यीशी भाषा, अरुणाचली हिंदी, रंगमंच, नाटक और सिनेमा के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश की लोक संस्कृति और परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाई है। उनका चर्चित नाटक ‘लप्या’ और फिल्म ‘संगी माई’, जिसका प्रदर्शन कांस फिल्म फेस्टिवल में भी हुआ, उनकी रचनात्मक यात्रा के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों के अंग्रेजी अनुवाद वाली पुस्तक का प्रकाशन उत्तराखंड की लोकभाषा और लोकसंस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह पुस्तक नई पीढ़ी को नेगी के व्यक्तित्व, कृतित्व और दशकों लंबी संगीत यात्रा से परिचित कराने में सहायक होगी।

275 सांस्कृतिक दल और 226 कलाकार सूचीबद्ध
धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है। लोक कलाकारों को सम्मान और अवसर देने के लिए सूचीबद्धकरण की प्रक्रिया सरल की गई है। अब तक 275 सांस्कृतिक दलों और 226 एकल कलाकारों को सूचीबद्ध किया जा चुका है। इससे कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि ढोल-दमाऊ जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों से जुड़े पात्र कलाकारों को प्रतिवर्ष निःशुल्क वाद्ययंत्र और वेशभूषा उपलब्ध कराई जा रही है। लोककला और साहित्य को जीवन समर्पित करने वाले वृद्ध एवं आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों, साहित्यकारों और लेखकों की मासिक पेंशन 3 हजार से बढ़ाकर 6 हजार रुपये की गई है। वर्तमान में 180 कलाकार इसका लाभ उठा रहे हैं।

दो साहित्य ग्राम विकसित करने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत रखने के लिए लोक कलाकारों के माध्यम से छह माह की प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। वर्ष 2025 में शुरू किए गए ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ के तहत पांच लाख रुपये की सम्मान राशि दी जा रही है। ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ के माध्यम से अब तक हिंदी सहित विभिन्न भाषाओं के 57 साहित्यकार सम्मानित किए जा चुके हैं। वहीं ‘साहित्य भूषण पुरस्कार’ की सम्मान राशि 5.51 लाख रुपये निर्धारित की गई है।

वर्ष 2022 से अब तक 102 लेखकों की पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक अनुदान भी दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में दो ‘साहित्य ग्राम’ विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन साहित्य ग्रामों में साहित्यकारों के लिए आवास, पुस्तकालय, अध्ययन केंद्र और संगोष्ठी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। देहरादून में हिमालय सांस्कृतिक केंद्र, आर्ट गैलरी और संग्रहालय जैसी पहलें भी इसी सांस्कृतिक दृष्टि का हिस्सा हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़ और छोपाटी जैसे पारंपरिक गीत तथा ढोल, दमाऊ, हुड़का, मशक, तुर्री और भंकोरा जैसे लोक वाद्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान के आधार हैं। आधुनिक संगीत के साथ लोकगीतों को नए कलेवर में प्रस्तुत कर रहे युवाओं को उन्होंने सांस्कृतिक विरासत का वाहक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ उत्तराखंड की लोक संस्कृति, भाषा, साहित्य और परंपराओं के संरक्षण के लिए काम कर रही है। समाज, कलाकारों और साहित्यकारों के सामूहिक प्रयासों से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा।

इस अवसर पर लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी, साहित्यकार, कलाकार, संस्कृति प्रेमी, विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।