हरिद्वार।
विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण को लेकर शिक्षकों की भूमिका को मजबूत करने के उद्देश्य से एस.एम. पब्लिक स्कूल, जगजीतपुर में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के तत्वावधान में एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों को विद्यार्थियों की भावनात्मक आवश्यकताओं को समझने, उनके व्यवहार में आने वाले बदलावों को पहचानने और संवेदनशीलता के साथ सहयोग प्रदान करने के लिए आवश्यक ज्ञान एवं कौशल दिया गया।

कार्यक्रम में डीपीएस रानीपुर, हरिद्वार की मुख्य शिक्षिका आरती बाटला और पुलिस मॉडर्न सीनियर सेकेंडरी स्कूल, 40वीं वाहिनी पीएसी, हरिद्वार के प्रधानाचार्य अनुराग शर्मा ने विषय विशेषज्ञ एवं रिसोर्स पर्सन के रूप में सहभागिता की। दोनों विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन, व्यवहारिक बदलाव और उनसे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर शिक्षकों के साथ विस्तार से चर्चा की। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने तथा विद्यालय में सकारात्मक और सहयोगपूर्ण वातावरण विकसित करने के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया गया।

कार्यक्रम में एस.एम. पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष अभिजीत पवार, प्रधानाचार्य रमणीक शाह सूद और उप-प्रधानाचार्या रेखा शर्मा सहित विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सहभागिता की।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य रमणीक शाह सूद ने कहा कि शिक्षक की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पढ़ाने और परीक्षा में बेहतर परिणाम दिलाने तक सीमित नहीं है। प्रत्येक बच्चे के लिए विद्यालय ऐसा स्थान होना चाहिए, जहां वह स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित, समझा हुआ और सहयोग प्राप्त करने वाला महसूस करे।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थी पढ़ाई के दबाव के साथ-साथ सामाजिक चुनौतियों, चिंता और विभिन्न भावनात्मक परिस्थितियों का सामना कर सकते हैं। इन परिस्थितियों का असर उनके व्यवहार, आत्मविश्वास, कक्षा में सहभागिता और सीखने की क्षमता पर भी पड़ सकता है। ऐसे में शिक्षक विद्यार्थियों के व्यवहार में होने वाले बदलावों को पहचानकर उन्हें समय पर आवश्यक सहयोग देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
प्रधानाचार्य ने कहा कि “एक स्वस्थ मन ही सार्थक शिक्षा और सर्वांगीण विकास की नींव है।” उन्होंने शिक्षकों से प्रशिक्षण में सक्रिय सहभागिता करने और अपने अनुभव साझा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां प्रत्येक विद्यार्थी स्वयं को सुना गया, सम्मानित, सुरक्षित और प्रोत्साहित महसूस करे तथा अपनी क्षमताओं का पूर्ण विकास कर सके।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में पूजा सिंह, सोनिका गुलाटी, राहुल कुमार, नितिन शर्मा, पलक अरोड़ा और प्रियंका यादव का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। कार्यक्रम ने शिक्षकों को विद्यार्थियों की भावनात्मक जरूरतों को पहचानने, संवेदनशील संवाद कायम करने और बेहतर शिक्षण वातावरण विकसित करने की दिशा में उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान किया।


