डीपीएस रानीपुर में विद्यार्थियों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने बांधा समां, साहित्यकारों की कालजयी रचनाएं मंच पर हुईं जीवंत
न्यूज 127, हरिद्वार।
दिल्ली पब्लिक स्कूल रानीपुर में आयोजित तीन दिवसीय स्वर्ण अक्षर-2026 स्वर्ण जयंती साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन साहित्य, कला, संस्कृति, विरासत और रचनात्मकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। जूनियर एवं मिडिल विंग के विद्यार्थियों ने पुस्तक प्रदर्शनी, साहित्यिक भ्रमण, कहानी-अभिनय और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने देर शाम तक दर्शकों को बांधे रखा।

साहित्यिक भ्रमण बना आकर्षण का केंद्र
मिडिल विंग के 39 सेक्शनों द्वारा प्रस्तुत साहित्यिक भ्रमण समारोह के प्रमुख आकर्षणों में रहा। विद्यार्थियों ने सुधा मूर्ति, रस्किन बॉन्ड, लुईस कैरोल, रोआल्ड डाहल, भारतेंदु हरिश्चंद्र, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, विलियम शेक्सपियर, मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद और जगदीश चंद्र माथुर जैसे प्रसिद्ध साहित्यकारों तथा उनकी कालजयी रचनाओं को अपनी प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत कर दिया। साहित्यिक पात्रों और कथानकों की प्रभावी प्रस्तुति ने दर्शकों को साहित्य की दुनिया से जोड़ दिया।

स्वर्णिम यात्रा की झलक ने किया भावुक
सांध्य समारोह में विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्यों, विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और विद्यालय के पूर्व शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अनुपम जग्गा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए डीपीएस रानीपुर की पांच दशक लंबी गौरवशाली यात्रा, उपलब्धियों और साहित्यिक-सांस्कृतिक योगदान पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विद्यालय की स्वर्णिम यात्रा को प्रदर्शित करती स्वर्ण जयंती वीडियो तथा विद्यार्थियों, अभिभावकों और लेखकों की रचनाओं से सुसज्जित डिजिटल पुस्तक ‘द गोल्डन क्विल’ का लोकार्पण किया गया।

रानी लक्ष्मीबाई से अष्टावक्र तक मंच पर साकार हुआ इतिहास
सांस्कृतिक संध्या में ‘मणिकर्णिका से रानी लक्ष्मीबाई’ की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। वरिष्ठ विद्यार्थियों ने संस्कृत नाटक ‘अष्टावक्र’ का प्रभावशाली मंचन किया। वहीं प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत कलाकार मेहताब अली नियाजी, एस. आकाश और खुर्रम अली नियाजी ने बाँसुरी, सितार और तबले की शास्त्रीय संगत से वातावरण को सुरमय बना दिया। छोटे बच्चों की देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुति ‘वीर गाथा’ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

प्रेरक विचारों ने विद्यार्थियों में भरा आत्मविश्वास
प्रसिद्ध प्रेरक वक्ता पदमजीत सहरावत की प्रेरणादायी ‘टॉकशाला’ ने विद्यार्थियों और दर्शकों में आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प की भावना को मजबूत किया। उन्होंने जीवन की चुनौतियों का साहस और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सामना करने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।

प्रधानाचार्य ने जताया आभार
प्रधानाचार्य डॉ. अनुपम जग्गा ने समारोह की सफलता में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, अभिभावकों और मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों की सृजनात्मक प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि स्वर्ण अक्षर-2026 विद्यालय की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी की रचनात्मक ऊर्जा से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

देर शाम तक चले कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे। वहीं लाइव प्रसारण के माध्यम से भी बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम से जुड़कर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। स्वर्णिम वर्ष के प्रथम आयोजन ‘स्वर्ण अक्षर’ का तीन दिवसीय अध्याय आज संपन्न होगा, लेकिन इसकी साहित्यिक और सांस्कृतिक धारा पूरे वर्ष विभिन्न आयोजनों के माध्यम से प्रवाहित होती रहेगी।








