स्वर्णिम इतिहास के 50वें वर्ष में पहुंचा DPS रानीपुर, ‘स्वर्ण अक्षर-2026’ ने बिखेरी संस्कृति और प्रतिभा की चमक










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पुस्तक मेले से शुरू हुआ स्वर्णोत्सव, राष्ट्रगीत, शास्त्रीय नृत्य, संस्कृत नाटक और ‘द्रौपदी—नवरस स्वरूपा’ ने मोहा मन

न्यूज 127, हरिद्वार
दिल्ली पब्लिक स्कूल, रानीपुर (DPS Ranipur) में विद्यालय की गौरवशाली 50 वर्षीय यात्रा के स्वर्णिम पड़ाव में प्रवेश के अवसर पर आयोजित ‘स्वर्ण अक्षर-2026’ का प्रथम दिवस साहित्य, संस्कृति, संगीत, नृत्य और रंगमंच की विविध प्रस्तुतियों से यादगार बन गया। पूरे दिन विद्यालय परिसर में स्वर्ण जयंती समारोह की भव्यता, उत्साह और उल्लास दिखाई दिया। विद्यार्थियों की बहुआयामी प्रतिभा ने समारोह में भारतीय संस्कृति और आधुनिक रचनात्मकता का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया।

स्वर्णोत्सव का शुभारंभ प्रातः पुस्तक मेले के साथ हुआ। जूनियर विंग में आयोजित पुस्तक मेले में विद्यार्थियों के साथ साहित्य प्रेमियों और अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कहानियों, साहसिक साहित्य, जीवनियों तथा विभिन्न ज्ञानवर्धक विषयों की पुस्तकों के आकर्षक संग्रह ने विद्यार्थियों को ज्ञान, कल्पना और रचनात्मकता की नई दुनिया से परिचित कराया। पुस्तक मेले ने विद्यार्थियों में पठन संस्कृति, जिज्ञासा और साहित्य के प्रति रुचि विकसित करने का प्रभावी संदेश दिया।

राष्ट्रगीत से हुआ भव्य समारोह का आगाज
संध्या होते ही विद्यालय परिसर स्वर्ण जयंती की रोशनी और उल्लास से जगमगा उठा। भावपूर्ण राष्ट्रगीत की प्रस्तुति के साथ मुख्य समारोह का शुभारंभ हुआ। राष्ट्रगीत ने पूरे वातावरण को देशभक्ति, गौरव और उत्साह से भर दिया।

समारोह के मुख्य अतिथि डीपीएस सोसाइटी, नई दिल्ली के चेयरमैन वी.के. शुंगलू रहे। विशिष्ट अतिथियों में डीजीपी कारागार अभिनव कुमार, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, बीएचईएल के कार्यपालक निदेशक रंजन कुमार सहित प्रशासनिक, न्यायिक, औद्योगिक और सामाजिक क्षेत्र की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं।

विद्यालय प्रबंधन की ओर से सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ और स्मृति-चिह्न भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। इसके बाद पारंपरिक दीप प्रज्वलन हुआ। दीप प्रज्वलन को ज्ञान, बुद्धिमत्ता और आशा के प्रकाश का प्रतीक बताते हुए स्वर्णोत्सव के प्रथम दिवस को मंगलमय शुरुआत दी गई।

पांच दशकों की गौरवशाली यात्रा को किया याद
विद्यार्थियों की ओर से प्रस्तुत स्वागत गीत और मनमोहक वाद्यवृंद प्रस्तुति ने उपस्थित अतिथियों और दर्शकों का मन मोह लिया। विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अनुपम जग्गा ने स्वागत संबोधन में डीपीएस रानीपुर की पांच दशकों की गौरवशाली यात्रा, उपलब्धियों और शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति विद्यालय की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर स्वर्ण जयंती वर्ष से संबंधित विशेष वीडियो प्रस्तुति दिखाई गई, जिसमें विद्यालय की स्थापना से लेकर अब तक की स्मृतियों, उपलब्धियों और गौरवशाली विरासत को जीवंत किया गया। वीडियो ने विद्यालय की यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ावों को भावनात्मक रूप से सामने रखा।

विद्यार्थियों की साहित्यिक प्रतिभा को मिला मंच
समारोह का विशेष आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा रचित साहित्यिक कृतियों के संग्रह का विमोचन रहा। प्रसिद्ध साहित्यकार रस्किन बॉन्ड को समर्पित इस पुस्तक में विद्यार्थियों की साहित्यिक प्रतिभा, रचनात्मक सोच और प्रकृति के प्रति उनके लगाव की झलक दिखाई दी। इस पहल ने विद्यार्थियों को लेखन और साहित्य के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान किया।

भारतीय शास्त्रीय नृत्य से लेकर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ तक
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में प्राथमिक विंग के विद्यार्थियों ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विभिन्न शैलियों पर आधारित आकर्षक प्रस्तुति दी। नन्हे कलाकारों की लय, भाव और तालमेल ने दर्शकों को प्रभावित किया।

इसके बाद प्री-प्राइमरी विंग के नन्हे कलाकारों ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना पर आधारित रंगारंग नृत्य प्रस्तुत कर विश्व-बंधुत्व, प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश दिया। बच्चों की मासूमियत और आत्मविश्वास से भरी प्रस्तुति ने समारोह में विशेष आकर्षण पैदा किया।

‘अष्टावक्र’ ने दिया श्रद्धा और विश्वास का संदेश
सीनियर विंग के विद्यार्थियों की ओर से प्रस्तुत संस्कृत नाटक ‘अष्टावक्र’ समारोह की प्रभावशाली प्रस्तुतियों में शामिल रहा। नाटक के माध्यम से श्रद्धा, समर्पण और परम सत्ता के प्रति विश्वास का संदेश दिया गया। विद्यार्थियों के प्रभावशाली अभिनय, संस्कृत भाषा के सशक्त प्रयोग और मंचन ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया।

प्रेरक वक्ता ने विद्यार्थियों को दिखाया सफलता का मार्ग
प्रसिद्ध प्रेरक वक्ता पदमजीत सेहरावत ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए निडर होकर सपने देखने, चुनौतियों को स्वीकार करने और निरंतर उत्कृष्टता की ओर बढ़ने का संदेश दिया। उनके प्रेरणादायी संबोधन ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का संचार किया।

इसके पश्चात मिडिल विंग के विद्यार्थियों ने ‘द्रौपदी—नवरस स्वरूपा’ की प्रस्तुति के माध्यम से महाभारत की द्रौपदी के जीवन के विभिन्न भावों और परिस्थितियों को मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। प्रस्तुति में अभिनय, नृत्य, संगीत और भावाभिव्यक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

अतिथियों ने विद्यालय और विद्यार्थियों को दी बधाई
मुख्य अतिथि वी.के. शुंगलू, डीजीपी अभिनव कुमार, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित सहित अन्य अतिथियों ने डीपीएस रानीपुर के ऐतिहासिक 50वें वर्ष में प्रवेश पर विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों को बधाई दी। अतिथियों ने कहा कि डीपीएस रानीपुर की पांच दशकों की यात्रा वास्तव में गौरवशाली और स्वर्णिम रही है। विद्यालय के विद्यार्थियों ने शिक्षा, संस्कृति और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा के माध्यम से देश-दुनिया में विद्यालय का नाम रोशन किया है।

अतिथियों ने विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। इस दौरान बीएचईएल के योगदान और विद्यालय के साथ उसके लंबे संबंधों की भी सराहना की गई।

स्वर्णोत्सव का प्रथम दिवस बना अविस्मरणीय
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ। ‘स्वर्ण अक्षर-2026’ का प्रथम दिवस डीपीएस रानीपुर की पांच दशकों की गौरवशाली विरासत, शैक्षणिक उत्कृष्टता, साहित्यिक चेतना और सांस्कृतिक समृद्धि का जीवंत उत्सव बनकर सामने आया।

पूरे समारोह में विद्यार्थियों की प्रतिभा, शिक्षकों का मार्गदर्शन, अभिभावकों का उत्साह और विद्यालय की गौरवशाली परंपरा एक साथ दिखाई दी। स्वर्ण जयंती वर्ष के प्रथम दिन आयोजित यह भव्य समारोह उपस्थित जनसमूह के लिए लंबे समय तक याद रहने वाला अनुभव बन गया।