खाद्य सुरक्षा विभाग की हरिद्वार में बड़ी कार्रवाई, 7 कंपनियों को नोटिस






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न्यूज 127, हरिद्वार
कांवड़ मेला 2026 के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग ने खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण अभियान को तेज करते हुए पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर, बेकरी उत्पाद और जीरा मसाला सोडा की निर्माता 7 कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं। निरीक्षण के दौरान खाद्य पदार्थों के लेबल पर अनिवार्य जानकारियां अंकित नहीं पाए जाने और भ्रामक दावों के इस्तेमाल सहित कई अनियमितताएं सामने आईं।

जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी महिमानंद जोशी ने बताया कि वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी दिलीप जैन के नेतृत्व में राष्ट्रीय राजमार्ग बहादराबाद कांवड़ क्षेत्र और चंडी घाट कांवड़ क्षेत्र में स्थित विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के पांच, बेकरी उत्पाद का एक और जीरा मसाला सोडा का एक नमूना प्रयोगशाला जांच के लिए लिया गया।

विभागीय जांच में अनंता एसेंशियल, हरिद्वार द्वारा पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के लेबल पर निर्माता कंपनी का नाम और पता अंकित नहीं करने के साथ ‘टेस्ट ऑफ नेचर’ जैसे दावे किए जाने पर नोटिस दिया गया। विनायक उद्योग, हरिद्वार को ‘पहाड़ी झरने के समान शुद्ध पानी’ के दावे, जबकि सिल्वर मिस्ट बेवरेज, अंबाला कैंट को ‘ट्रीटेड बाई वर्ल्ड क्लास टेक्नोलॉजी’ जैसे दावे के चलते नोटिस जारी किया गया।

इसी तरह जया इंटरप्राइजेज, सहारनपुर को ‘चैंपियंस ड्रिंक्स’ और नगीना बेवरेज, नगीना को न्यूट्रीशनल क्लेम के मामले में नोटिस दिया गया है। विभाग के अनुसार इन दावों और लेबलिंग संबंधी प्रावधानों की खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेबलिंग एंड डिस्प्ले) रेगुलेशन, 2020 के तहत जांच की जा रही है।

वहीं यूकेटो बेकर्स, हरिद्वार के बेकरी खाद्य पदार्थों के लेबल पर बैच नंबर, निर्माण तिथि और एक्सपायरी तिथि अंकित नहीं पाई गई। इसके अलावा एसओ एंड एसओ बेवरेज, हरिद्वार की जीरा मसाला सोडा की बोतलों पर एक्सपायरी तिथि अंकित नहीं होने पर नोटिस जारी किया गया।

सभी सात निर्माता कंपनियों को सात दिन के भीतर निरीक्षण के दौरान सामने आई लेबलिंग संबंधी अनियमितताओं पर जवाब देने और विभाग द्वारा मांगे गए अनिवार्य दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में जवाब और दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने अथवा जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने की स्थिति में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत न्यायालय में वाद दायर कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।