न्यूज 127, देहरादून
साइबर अपराध, मानव तस्करी और नशे के बढ़ते नेटवर्क के खिलाफ उत्तराखंड पुलिस की कार्रवाई अब और हाईटेक और तेज होगी। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में पुलिस विभाग की समीक्षा करते हुए साइबर पुलिसिंग, डिजिटल इन्वेस्टीगेशन, मानव एवं बाल तस्करी तथा नारकोटिक्स के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि अपराधियों तक पहुंचने के लिए पुलिस को पारंपरिक जांच के साथ आधुनिक तकनीक और डेटा का अधिकतम इस्तेमाल करना होगा।
मानव तस्करी के नेटवर्क पर सीधा प्रहार
मुख्य सचिव ने मानव एवं बाल तस्करी के मामलों में मैदानी ही नहीं, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में भी प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस के पोर्टल का जल्द इंटीग्रेशन करने तथा एपीआई के माध्यम से डेटा में विसंगतियां खत्म करने के निर्देश दिए। उन्होंने लापता बालिकाओं और नाबालिग बच्चों को तलाशने के लिए डेडिकेटेड टीम और मजबूत मैकेनिज्म विकसित करने को कहा। अनट्रेस्ड बच्चों और महिलाओं की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाने तथा विभिन्न विभागों के बीच डेटा शेयरिंग बढ़ाने पर भी जोर दिया। मुख्य सचिव ने ऑपरेशन स्माइल का नवीनतम डेटा प्रस्तुत करने और मानव एवं बाल तस्करी के मामलों का केस-वाइज विश्लेषण करने को कहा। उन्होंने तस्करी के संगठित नेटवर्क की पहचान कर उसके खिलाफ मजबूत तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए।
रेस्क्यू के बाद पुनर्वास भी प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि पीड़ितों के रेस्क्यू के बाद उनकी रिहैबिलिटेशन पर भी विशेष ध्यान देना होगा। दूसरे राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर पीड़ितों को सुरक्षित रूप से उनके अभिभावकों तक पहुंचाने की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिला स्तर पर भी डेडिकेटेड टीम और मजबूत रेस्क्यू व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए।
साइबर पुलिसिंग में बैंकिंग एक्सपर्ट भी जुड़ेंगे
साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए मुख्य सचिव ने साइबर पुलिसिंग की मैनपावर बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने साइबर विशेषज्ञों के साथ बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी व्यवस्था से जोड़ने की जरूरत बताई, ताकि साइबर ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई और संदिग्ध लेनदेन की पड़ताल प्रभावी तरीके से हो सके। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के तहत प्रभावी कार्रवाई के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा एनकॉर्ड की बैठक में इस संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण देने के निर्देश भी दिए।
विवेचना होगी डिजिटल, थानों को मिलेगी इन्वेस्टीगेशन किट
मुख्य सचिव ने पुलिस विवेचना में तकनीक का अधिकतम उपयोग करने पर जोर दिया। विवेचना अधिकारियों को आवश्यक इन्वेस्टीगेशन किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने अधिक एफआईआर वाले थानों में अलग इन्वेस्टीगेशन विंग खोलने की संभावना तलाशने को कहा। e-FIR के रिजेक्शन का विश्लेषण और क्रॉस-वेरिफिकेशन करने के साथ न्यायश्रुति, एफएसएल, मालखाना और डायल-112 को शीघ्र लाइव करने के निर्देश दिए। e-Summons के अधिकाधिक इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया।
कमजोर नेटवर्क वाले थानों में बढ़ेगी बैंडविड्थ
आईसीजेएस 2.0 साइट्स पर नेटवर्क कनेक्टिविटी की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और बैंडविड्थ बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, डेटा शेयरिंग और विभागीय समन्वय के जरिए पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, तकनीक आधारित और जनोन्मुख बनाया जाना जरूरी है।
सीज गाड़ियों से थानों का स्पेस खाली होगा
मुख्य सचिव ने थानों में लंबे समय से खड़ी सीज गाड़ियों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में सीज वाहन थानों का अधिकांश स्थान घेर रहे हैं, जिससे पुलिस के नियमित कामकाज के लिए जगह की कमी हो रही है। उन्होंने सीज वाहनों के निस्तारण के लिए डिजिटल स्टोरेज व्यवस्था अपनाने तथा जिलों में अभियान चलाकर वाहनों का निस्तारण कराने के निर्देश दिए। इसकी मासिक रिपोर्ट भी उपलब्ध कराने को कहा गया।
बैठक में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, सचिव गृह शैलेश बगौली, एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन, आईजी डॉ. निलेश आनंद भरणे, आईजी सुनील कुमार मीणा, एसएसपी तृप्ति भट्ट और एसएसपी अजय सिंह सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।








