NEWS 127, खटीमा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को उस वक्त चर्चा में आ गए, जब वह बिना किसी औपचारिकता के मेलाघाट रोड पर पैदल चलते हुए अचानक मिलन डेरी पहुंच गए। मुख्यमंत्री ने डेरी में बैठकर चाय की चुस्की ली और स्थानीय दुकानदारों एवं नागरिकों से आत्मीय संवाद किया। सीएम का यह सहज अंदाज देखकर आसपास मौजूद लोगों में खासा उत्साह नजर आया।
मिलन डेरी में चाय का आनंद लेते हुए मुख्यमंत्री ने दुकानदारों से उनके कारोबार और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री का स्थानीय कारोबारी के प्रतिष्ठान पर इस तरह पहुंचना छोटे व्यापारियों के लिए सम्मान और प्रोत्साहन का संदेश बन गया।
‘लोकल फॉर वोकल’ सिर्फ नारा नहीं, आत्मनिर्भरता की ताकत
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों, दुकानों और छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहित करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘लोकल फॉर वोकल’ आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की मजबूत नींव है।
उन्होंने कहा कि जब लोग अपने आसपास के स्थानीय दुकानदारों, कारीगरों, उद्यमियों और उत्पादों को प्राथमिकता देंगे, तो इसका सीधा फायदा स्थानीय बाजार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा। इससे छोटे कारोबारियों का मनोबल बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
स्थानीय हुनर और उत्पादों को बाजार देने पर जोर
धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान यहां के स्थानीय उत्पादों, हुनर और उद्यमिता से भी जुड़ी है। राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए लगातार काम कर रही है।
मेलाघाट रोड पर पैदल चलकर स्थानीय डेरी में चाय पीने की मुख्यमंत्री की पहल ने ‘लोकल फॉर वोकल’ के संदेश को जमीन पर उतारने का सहज उदाहरण पेश किया। उनकी इस पहल ने संदेश दिया कि स्थानीय उत्पादों और कारोबार को मजबूती देने के लिए सरकार के साथ समाज की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।








