AI से स्मार्ट होगी उत्तराखंड पुलिसिंग, अपराध नियंत्रण से साइबर सुरक्षा तक तकनीक का बढ़ेगा इस्तेमाल










Listen to this article

न्यूज 127, देहरादून।
बदलते तकनीकी दौर और अपराध के नए स्वरूपों के बीच उत्तराखंड पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। अपराध विश्लेषण, साइबर सुरक्षा, इंटेलिजेंट सर्विलांस, डेटा आधारित निर्णय और रोजमर्रा के पुलिस कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में एआई के संभावित उपयोग को लेकर पुलिस मुख्यालय में विशेषज्ञों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने गहन मंथन किया।

पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ की अध्यक्षता में बुधवार को सरदार पटेल भवन स्थित सभागार में ‘एआई फॉर स्मार्ट पुलिसिंग : फ्रॉम एवरीडे पुलिस ऑपरेशंस टू इंटेलिजेंट सर्विलांस एंड साइबर सिक्योरिटी’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का संयोजन पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण अनंत शंकर ताकवाले ने किया।

अपराध रोकथाम से निर्णय क्षमता तक एआई पर चर्चा
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ प्रो. सौमित्र सतपथी, प्रो. सुदीप रॉय, प्रो. राघवेंद्र सिंह रोहित तथा अपर पुलिस अधीक्षक अभिसूचना एवं सुरक्षा अंकुश मिश्रा ने पुलिसिंग में तकनीक और एआई की बढ़ती भूमिका पर प्रस्तुतियां दीं। विशेषज्ञों ने ‘एआई इन एवरीडे पुलिसिंग’, ‘फ्रॉम क्राइम प्रिवेंशन टू स्मार्ट डिसीजन मेकिंग’, ‘एआई फॉर स्मार्ट पुलिसिंग’ और ‘इमर्जिंग साइबर सिक्योरिटी चैलेंजेज फॉर पुलिस’ जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान पुलिसिंग को तकनीक आधारित, त्वरित और अधिक सटीक बनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

साइबर सुरक्षा और डेटा प्रबंधन पर भी जोर
कार्यशाला में साइबर सुरक्षा, इंटेलिजेंट सर्विलांस, अपराध के आंकड़ों का विश्लेषण, डेटा आधारित पुलिसिंग, रिकॉर्ड प्रबंधन और दैनिक पुलिस कार्यों में एआई के इस्तेमाल जैसे विषय प्रमुख रहे। पुलिस अधिकारियों ने अपने अनुभवों और जमीनी स्तर पर सामने आने वाली चुनौतियों को विशेषज्ञों के साथ साझा किया। संभावित तकनीकी समाधानों और उनके व्यावहारिक इस्तेमाल पर भी विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि एआई के इस्तेमाल के साथ डेटा सुरक्षा, नागरिकों की निजता, सूचनाओं की विश्वसनीयता और जिम्मेदार तकनीकी उपयोग जैसे पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

‘मानवीय विवेक का विकल्प नहीं है एआई’
डीजीपी दीपम सेठ ने कहा कि तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, त्वरित और डेटा आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई को मानवीय विवेक के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि पुलिस अधिकारियों की निर्णय क्षमता को सशक्त करने वाले तकनीकी माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, विश्वसनीयता और जिम्मेदार एआई के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड पुलिस को तकनीक-सक्षम और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार पुलिस बल के रूप में विकसित किया जाएगा।

कार्यशाला में अपर पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था वी. मुरूगेशन, अपर पुलिस महानिदेशक प्रशासन ए.पी. अंशुमान, पुलिस महानिरीक्षक एवं निदेशक यातायात कृष्ण कुमार वी.के., पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण अनंत शंकर ताकवाले, पुलिस महानिरीक्षक कार्मिक सुनील कुमार मीणा, पुलिस महानिरीक्षक मुख्यालय/पीएंडएम बरिन्दरजीत सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक सतर्कता प्रह्लाद मीणा समेत पुलिस मुख्यालय और देहरादून स्थित विभिन्न इकाइयों के वरिष्ठ अधिकारी एवं अनुभाग प्रभारी मौजूद रहे।