संस्कार और आधुनिक शिक्षा के संगम का प्रतीक बना SDIMT










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हवन-पूजन के साथ मनाया 18वां स्थापना दिवस, छात्र-छात्राओं ने दी आहुतियां

न्यूज 127, हरिद्वार
स्वामी दर्शनानन्द संस्थान प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी (एसडीआईएमटी) का 18वां स्थापना दिवस गुरुवार को वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-पूजन के साथ श्रद्धा एवं उल्लासपूर्वक मनाया गया। संस्थान के स्थापना दिवस समारोह में शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ छात्र-छात्राओं ने भी हवन में आहुतियां देकर संस्थान की उन्नति, विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और समाज के कल्याण की कामना की।

इस अवसर पर संस्थान की निदेशक डॉ. जयलक्ष्मी ने कहा कि एसडीआईएमटी की स्थापना 3 सितंबर 2009 को हुई थी। पिछले वर्षों में संस्थान ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वर्तमान में संस्थान में प्रबंधन, व्यवसाय प्रशासन, कंप्यूटर अनुप्रयोग और पॉलिटेक्निक से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि संस्थान विद्यार्थियों को केवल रोजगारपरक शिक्षा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनमें संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए भी निरंतर प्रयासरत है।

स्वामी दर्शनानन्द गुरुकुल महाविद्यालय के आचार्य विरक्त देव एवं स्वामी नारायण देव ने कहा कि एसडीआईएमटी का उद्देश्य प्राचीन भारतीय ज्ञान, संस्कार और जीवन-मूल्यों के साथ आधुनिक शिक्षा का समन्वय स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थी के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है।

हवन के दौरान पंडित हेमंत तिवारी ने यज्ञ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में यज्ञ और हवन का विशेष आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व रहा है। यज्ञ के माध्यम से वातावरण की शुद्धि के साथ मन में सकारात्मक ऊर्जा और कल्याण की भावना का संचार होता है।

स्थापना दिवस के अवसर पर कश्मीरी लाल गोयल, चमेली देवी, डॉ. जयलक्ष्मी, अशोक गौतम, पंकज चौधरी, अनुराग गुप्ता, आशीष कुमार, धरणीधर वाग्ले, वर्षा रानी, ज्योति राजपूत, उमेश चंद्रा, देवेंद्र सिंह रावत, दिलखुश, वैशाली चौहान, शुभम सिंह और अंकुर चौहान सहित संस्थान के शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं छात्र-छात्राओं ने हवन में आहुति दी।

समारोह में संस्थान की अब तक की शैक्षणिक यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की गई। स्थापना दिवस ने विद्यार्थियों और शिक्षकों में नई ऊर्जा एवं उत्साह का संचार किया।