डीएवी पब्लिक स्कूल में शिक्षक दिवस पर विद्यार्थियों ने गीत-नृत्य से व्यक्त किया गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता, तकनीकी युग में शिक्षक की भूमिका को बताया अपरिहार्य
News 127, देहरादून।
“गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णुः, गुरुर्देवो महेश्वरः…” के पावन भाव से जब विद्यालय परिसर गूंजा तो वातावरण में गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा और भारतीय संस्कृति की आत्मीयता महसूस होने लगी। अवसर था शिक्षक दिवस का और मंच था डीएवी पब्लिक स्कूल, देहरादून का, जहां 5 सितंबर को भारत के महान शिक्षाविद्, दार्शनिक एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की स्मृति में शिक्षक दिवस हर्षोल्लास और श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल शिक्षकों को शुभकामनाएं देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने वाले गुरुजनों के प्रति सम्मान, आभार और कृतज्ञता के भाव को अभिव्यक्त करना था। इसी भावना के साथ विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह से कार्यक्रम में सहभागिता की और अपने शिक्षकों को समर्पित विभिन्न प्रस्तुतियों से समारोह को यादगार बना दिया।
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ, तिलक से हुआ गुरु सम्मान
कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। ज्ञान के प्रकाश के प्रतीक दीप ने समारोह के आध्यात्मिक एवं गरिमापूर्ण वातावरण को और अधिक प्रभावी बना दिया।
भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के शाश्वत भाव “गुरु साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः” को केंद्र में रखते हुए पूरा आयोजन शिक्षकों को समर्पित किया गया। विद्यार्थियों ने सभी शिक्षकों के माथे पर तिलक लगाकर उनका सम्मान किया। इस आत्मीय सम्मान ने समारोह में भावनाओं की ऐसी गर्माहट भर दी, जिसमें गुरु और शिष्य के रिश्ते की गहराई सहज ही दिखाई दी।

गीत-नृत्य से सजा गुरु सम्मान का मंच
शिक्षक दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के सम्मान में विभिन्न रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। गीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने शिक्षकों के प्रति अपने स्नेह, सम्मान और कृतज्ञता को अभिव्यक्त किया।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में उत्साह के साथ भावनाओं का भी सुंदर समावेश देखने को मिला। मंच पर विद्यार्थियों का आत्मविश्वास और शिक्षकों के लिए उनके सम्मान ने पूरे वातावरण को उल्लास से भर दिया। प्रस्तुतियों ने शिक्षकों का मन मोह लिया और समारोह में मौजूद सभी लोगों को भावविभोर कर दिया।
तकनीक शिक्षा की सहयोगी, शिक्षक का विकल्प नहीं : शालिनी समाधिया
विद्यालय की प्रधानाचार्या शालिनी समाधिया ने शिक्षक दिवस की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्तमान समय तेजी से बदल रहा है और शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे दौर में शिक्षकों को भी समय के अनुरूप स्वयं को निरंतर विकसित और परिवर्तित करते रहना होगा।
उन्होंने कहा कि तकनीक को शिक्षा का प्रभावी सहायक बनाकर विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया को और बेहतर बनाया जा सकता है, लेकिन तकनीक कभी भी शिक्षक के ज्ञान, संवेदनशीलता, अनुभव और मानवीय स्पर्श का स्थान नहीं ले सकती।
प्रधानाचार्या ने शिक्षकों से बदलते शैक्षिक परिवेश के साथ कदम मिलाकर चलने का आह्वान करते हुए कहा कि एक शिक्षक का दायित्व केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाना, उनके भीतर मानवीय मूल्यों का विकास करना और उन्हें एक बेहतर नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना भी है।
गुरु-शिष्य परंपरा का भाव बना समारोह की आत्मा
शिक्षक दिवस का यह आयोजन केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा। इसके केंद्र में गुरु के प्रति वह सम्मान था, जिसे भारतीय संस्कृति सदियों से सर्वोच्च स्थान देती आई है।
विद्यार्थियों द्वारा शिक्षकों को तिलक लगाना, उनके सम्मान में प्रस्तुतियां देना और अपनी भावनाओं को मंच के माध्यम से व्यक्त करना इस बात का प्रमाण रहा कि आधुनिक तकनीकी युग में भी गुरु-शिष्य संबंध की आत्मीयता कायम है।
कार्यक्रम के समापन तक विद्यालय परिसर में उत्साह, उल्लास और सम्मान का वातावरण बना रहा। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने शिक्षक दिवस को एक स्मरणीय, भावपूर्ण और प्रेरणादायी अवसर में बदल दिया।








