संस्कृत विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह: राज्यपाल ने 32 मेधावियों को गोल्ड मेडल और 6 को सौंपी पीएचडी




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संस्कृत को आधुनिक तकनीक, एआई व अनुसंधान से जोड़ने की जरूरत: राज्यपाल गुरमीत सिंह

न्यूज 127, हरिद्वार।
उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के बारहवें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने 32 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल तथा छह शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि देकर सम्मानित किया। समारोह में कुल 2938 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। समारोह में राज्यपाल ने लोक गायिका पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल, डॉ. अनुसूया प्रसाद पंत, प्रो. राम कुमार शर्मा तथा लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विवि के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय को मानद उपाधियों से विभूषित किया।

राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि जीवन की नई यात्रा की शुरुआत है। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और संस्कारों से राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि संस्कृत केवल प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा की आधारशिला है। इसे आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और शोध से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर बल दिया।

कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने विवि की उपलब्धियों का ब्योरा देते हुए कहा कि संस्कृत को केवल परंपरा तक सीमित न रखकर इसे समाजोपयोगी ज्ञान का माध्यम बनाया जा रहा है। संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने कहा कि संस्कृत का उत्थान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध एवं अनुसंधान के नए आम खोल सकते हैं, लेकिन संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने का वास्तविक कार्य समाज और नई पीढ़ी की भागीदारी से ही पूरा होगा। हमें संस्कृत की विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे नवाचार से जोड़ना होगा।

पूर्व कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय ने संस्कृत को आधुनिक ज्ञान से जोड़ने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में कुलसचिव दिनेश कुमार, पूर्व कुलपति प्रो. सुधा रानी पांडेय, प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्राग्ज्योतिषपुर विश्वविद्यालय, गुवाहाटी के कुलपति प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी,श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय,नई दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर,उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पाण्डेय सहित कार्यपरिषद एवं विद्या परिषद के सदस्य,जनप्रतिनिधि शिक्षकगण तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

वैदिक ज्ञान और आधुनिकता का समन्वय जरूरी: प्रो. तिवारी
हरिद्वार। प्राग्ज्योतिषपुर विश्वविद्यालय, गुवाहाटी के कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने कहा कि वैदिक वाङ्मय में ज्ञान-विज्ञान का अनुपम भंडार है। कालचक्र के अनेक उतार-चढ़ाव के बावजूद संस्कृत अपनी ज्ञानशक्ति के बल पर आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि वैदिक ज्ञान और आधुनिकता का समन्वय भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ नैतिकता, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व से भी जोड़ना जरूरी है। उन्होंने शोध, नवाचार और ज्ञानार्जन के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

इन छात्रों को मिला गोल्ड मैडल और पीएचडी की उपाधि दी
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने शैक्षणिक सत्र 2024-25 के छात्र अरुण कुमार, अभिषेक बधानी, केशव अवस्थी, भास्कर चंद्र नैनवाल, शिवप्रसाद, पुनीत कुमार, जितेंद्र उनियाल, कमल ओझा, गौरव जगूड़ी, स्वामी रमतानंद, मोहम्मद शोएब, वंश शर्मा, स्वप्निल यादव, अनुज कुमार, आफरीन बानो, गगनदीप गुरागांई और 2025-26 सत्र के छात्र आयुष मिश्रा, गिरीश भद्री, अशोक कुमार काफले, देवेश सती, संजीव कुमार शर्मा, बलबीर-सार स्वतः, आशीष भदौला, कुमारी रितिका, स्वामी सकृपा नंदा, आयशा, मोहम्मद रईस अहमद, राजकुमार कुश, खुशबू, नईम अहमद, सचिन पालीवाल, जगदीश चंद्र पांडे को गोल्ड मैडल देकर सम्मानित किया गया। वहीं, शैलेंद्र बहुगुणा, अभिषेक परगांई, अमित प्रकाश बंदोलिया, अरुण ममगांई, जसुदेव, आशुतोष काला छात्रों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

चार विशिष्ट विभूतियों को किया गया मानद उपाधियों से सम्मानित
हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने देश की चार विशिष्ट विभूतियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित एवं अलंकृत किया। समारोह में श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश कुमार पांडे को महामहोपाध्याय की मानद उपाधि प्रदान की गई। लोकसंस्कृति एवं कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल को कलाश्री की उपाधि से विभूषित किया गया। शिक्षा एवं संस्कृत अध्ययन के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए प्रो. राम कुमार शर्मा और डॉ. अनसुइया प्रसाद पंत को विद्यावाचस्पति (डॉक्टर ऑफ लिटरेचर) की मानद उपाधि प्रदान की गई।

संस्कृत विश्व की सर्वाधिक पूर्ण एवं तर्कसंगत भाषा: डॉ. धन सिंह रावत
हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि संस्कृत विश्व की सर्वाधिक पूर्ण एवं तर्कसंगत भाषा ही नहीं, बल्कि अत्यंत वैज्ञानिक और कंप्यूटर अनुकूल भाषा भी है। इसमें जीवन विकास की अपार संभावनाएं हैं। संस्कृत अधिकांश भारतीय भाषाओं की जननी है और उनकी अधिकांश शब्दावली संस्कृत से ली गई है अथवा इससे प्रभावित है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से भारत सरकार का संस्कृत मंत्रालय संस्कृत के समुचित प्रचार-प्रसार के लिए प्रयास कर रहा है। हम सभी को इसमें अपना व्यक्तिगत योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में पारंपरिक विषयों के साथ शिक्षा शास्त्र और योग आदि विषयों की पढ़ाई संस्कृत माध्यम से हो रही है। विश्वविद्यालय बहुशास्त्रीय अनुसंधान को भी प्रोत्साहित कर रहा है। उन्होंने कामना की कि विश्वविद्यालय अनुसंधान के क्षेत्र में उत्तराखंड और देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का मानक बने तथा यहां होने वाले शोध कार्यों का विश्व के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों के साथ आदान-प्रदान हो।