पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की दूरदर्शी सोच से उत्तराखंड के गरीबों को मिल रहा जीवनदान, अटल आयुष्मान योजना बनी संजीवनी








Listen to this article


नवीन चौहान
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सत्ता की कुर्सी पर बैठकर गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों के हितों को ध्यान में रखा। उन्होंने प्रदेश में शिक्षा, चिकित्सा और स्वावलंबन की दिशा में प्रभावी कदम उठाए। लेकिन आज हम बात करेंगे कोरोना संक्रमण काल में गरीबों के लिए संजीवनी बनी अटल आयुष्मान योजना की। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दूरदर्शी सोच रखते हुए बिना किसी भेदभाव के प्रदेश के सभी परिवारों के लिए इस अटल आयुष्मान योजना को लागू किया। जिसका सीधा लाभ वर्तमान कोरोना संक्रमण काल में गरीब जनता को मिल रहा है। अटल आयुष्मान कार्ड धारकों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है।
बताते चले कि उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां इस योजना को संपूर्ण प्रदेश के परिवारों के लिए लागू करवाया गया। ताकि बीमारी से जूझते हुए परिवारों की आर्थिकी कमजोर ना हो पाए। बीमार व्यक्ति के परिजनों को अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई, जेवर, सम्पत्ति आदि बेचकर अस्पताल का बिल ना चुकाना पड़े।
कोरोना काल में आयुष्मान भारत और अटल आयुष्मान योजना के कारण देश में करोड़ों और देवभूमि उत्तराखंड के लाखों लोग अपना निःशुल्क, रियायती ईलाज करा पा रहे हैं। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की दूरगामी और धरातल से जुड़ी सोच के सार्थक परिणाम दिखाई पड़ रहे है।
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बीते चार सालों में एक ईमानदार जनसेवक के रूप में कार्य करते हुए जनता की सेवा की। उन्होंने जनता के लिए सोचा और जनहित के निर्णय को प्राथमिकता दी। त्रिवेंद्र सिंह रावत की सोच का ही परिणाम है कि प्रदेश के कई लोग कोरोना के संकट काल में अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना से जुड़े अस्पतालों में निःशुल्क, रियायती इलाज करवा पा रहे हैं। कोरोना ही नहीं अपितु 25 दिसंबर 2018 से मात्र इन ढाई सालों में इस योजना से प्रदेश के लगभग ढाई लाख से अधिक लोग अपनी गंभीर से गंभीर बीमारियों का 05 लाख तक निःशुल्क इलाज करवा चुके हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वास्थ्य को लेकर जनता जनार्दन के लिए एक सोच रही “हर बीमार-मुफ्त उपचार” जो आज सार्थक सिद्ध हो रही है। पुरानी कहावत हैं कि बीमारी में छोटी-सी-छोटी मदद आपको जीवन भर के लिए याद रहती है और जहां बात हो बड़ी से बड़ी बीमारी के मुफ्त इलाज की हो तो इंसानों ऐसे क्षण को जन्म जन्मांतर तक याद रखना चाहेगा। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भले ही बोलते कम थे लेकिन उनकी दूरदर्शी सोच प्रदेशवासियों के संजीवनी बूटी बन गई है।