डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल, जगजीतपुर में सीबीएसई का ‘कौशल बोध’ कार्यक्रम








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पथ प्रवाह, हरिद्वार।
डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल, जगजीतपुर, हरिद्वार में 28 जुलाई 2026 को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, सीबीएसई, नई दिल्ली के तत्वावधान में ‘कौशल बोध (स्किल एजुकेशन)’ विषय पर एक दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 एवं नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (एनसीएफ-एसई) के अनुरूप शिक्षकों को कौशल-आधारित शिक्षा की प्रभावी रणनीतियों से सशक्त बनाना और उन्हें कक्षा-कक्ष में लागू करने हेतु तैयार करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर विद्यालय प्रधानाचार्य मनोज कुमार कपिल, डॉ. किरण दलाल (प्राचार्य, ब्राइट स्कॉलर सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सोनीपत), स्वेतलाना (उप-प्राचार्या, द हिमालयन इंटरनेशनल स्कूल, विकासनगर, देहरादून), मनीषा सेसन (प्रधानाचार्या, श्यामा पब्लिक स्कूल, दौरांग) तथा रमणीक शाह सूद (प्रधानाचार्य, एसएम पब्लिक स्कूल, हरिद्वार) ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर ज्ञान, नवाचार और सकारात्मकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मधुर स्वागत गीत एवं गणेश वंदना ने कार्यक्रम को गरिमामय और आध्यात्मिक वातावरण प्रदान किया।

इस अवसर पर प्रधानाचार्य मनोज कुमार कपिल ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि आज के समय में विद्यार्थियों को केवल विषय-ज्ञान ही नहीं, बल्कि कौशल-आधारित शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और भविष्य के लिए तैयार नागरिक बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से कार्यशाला में सक्रिय सहभागिता कर प्राप्त ज्ञान को अपने-अपने विद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन सीबीएसई के अनुभवी रिसोर्स पर्सन्स डॉ. किरण दलाल एवं स्वेतलाना द्वारा किया गया। दोनों विशेषज्ञों ने संवादात्मक सत्रों के माध्यम से कौशल-आधारित शिक्षा के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए 21वीं सदी के महत्वपूर्ण कौशल—क्रिटिकल थिंकिंग, रचनात्मकता, सहयोगात्मक कार्य, प्रभावी संप्रेषण, समस्या-समाधान, डिजिटल साक्षरता तथा उद्यमशीलता—के विकास पर विशेष बल दिया।

कार्यशाला में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा के विभिन्न जनपदों से आए 111 शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को अत्यंत संवादात्मक एवं प्रेरणादायी बना दिया। इस दौरान शिक्षकों को अनुभवात्मक अधिगम, प्रोजेक्ट-आधारित गतिविधियों, दक्षता-आधारित मूल्यांकन तथा वास्तविक जीवन से जुड़े अनुप्रयोगों के माध्यम से शिक्षण को प्रभावी बनाने के व्यावहारिक उपाय बताए गए।

कार्यशाला में समूह चर्चा, ब्रेनस्टॉर्मिंग एवं सहयोगात्मक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों ने कौशल-आधारित पाठ योजनाओं एवं नवीन शिक्षण विधियों का निर्माण किया। साथ ही, लर्नर-सेंट्रिक शिक्षण वातावरण की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया, जिसमें विद्यार्थी सीखने की प्रक्रिया के केंद्र में होते हैं।

समापन सत्र में आयोजित प्रश्नोत्तर के दौरान प्रतिभागियों ने अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया तथा कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक बताया।

समग्र रूप से यह सीबीएसई कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम अत्यंत सफल एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ। इसने शिक्षकों को कौशल-आधारित शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करने हेतु नवीन दृष्टिकोण, रणनीतियाँ एवं व्यावहारिक संसाधन उपलब्ध कराए, जिससे विद्यार्थियों के समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा।

अंत में सभी शिक्षकों ने यह संकल्प लिया कि वे कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान एवं अनुभव को अपने-अपने विद्यालयों में लागू कर विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, सक्षम एवं उत्तरदायी नागरिक बनाने में योगदान देंगे।

कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए प्रधानाचार्य मनोज कुमार कपिल ने सीबीएसई के संयुक्त निदेशक सतीश कुमार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों के व्यावसायिक विकास के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।