DPS के प्रधानाचार्य डॉ. अनुपम जग्गा के कार्यकाल में उपलब्धियों का स्वर्णिम विस्तार










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शैक्षणिक अनुभव, कुशल नेतृत्व और नवाचार का समन्वय बना विद्यालय की ताकत; ‘स्वर्ण अक्षर-2026’ में दिखी पांच दशक की विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की सोच

न्यूज 127, नवीन चौहान
दिल्ली पब्लिक स्कूल रानीपुर की पांच दशक लंबी गौरवशाली यात्रा में अनेक उपलब्धियां दर्ज हैं, लेकिन वर्तमान दौर में विद्यालय की शैक्षणिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में प्रधानाचार्य डॉ. अनुपम जग्गा के नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका दिखाई देती है। उनके शैक्षणिक अनुभव, दूरदर्शी सोच और नेतृत्व क्षमता ने विद्यालय की उत्कृष्टता की परंपरा को मजबूत करने के साथ उसे बदलते समय की आवश्यकताओं से जोड़ने का प्रयास किया है।

डीपीएस रानीपुर के स्वर्ण जयंती वर्ष में आयोजित तीन दिवसीय ‘स्वर्ण अक्षर-2026—स्वर्णिम प्रवाह’ इसका उदाहरण रहा। साहित्य, कला, संगीत, नृत्य, रंगमंच और भारतीय संस्कृति को एक मंच पर लाकर विद्यार्थियों की बहुआयामी प्रतिभा को सामने लाना केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि शिक्षा को व्यापक अर्थों में देखने की सोच का परिचायक रहा। पुस्तक मेले से लेकर साहित्यिक भ्रमण, संस्कृत नाटक, शास्त्रीय संगीत, कथक, कविता और आधुनिक रंगमंच तक विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिले।

डॉ. अनुपम जग्गा की कार्यशैली की विशेषता यह भी रही है कि विद्यालय की पुरानी गौरवशाली विरासत को संरक्षित रखते हुए नई पीढ़ी के लिए नए अवसर तैयार किए जाएं। ‘स्वर्ण अक्षर’ में विद्यालय के पांच दशक के सफर को वीडियो के माध्यम से सामने रखना, विद्यार्थियों की रचनाओं से तैयार ‘द गोल्डन क्विल’ का लोकार्पण और साहित्यकारों की रचनाओं को विद्यार्थियों द्वारा जीवंत करना इसी सोच को दर्शाता है।

विद्यालय के कार्यक्रमों में भारतीय संस्कृति और आधुनिक शिक्षा का संतुलन भी प्रमुखता से दिखाई देता है। ‘अष्टावक्र’, ‘द्रौपदी—नवरस स्वरूपा’, ‘वीर गाथा’, ‘नृत्य नवरस’ और रामायण के कथक प्रसंगों जैसी प्रस्तुतियों ने विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम किया। वहीं अंग्रेजी नाटक, साहित्यिक गतिविधियां और प्रेरक संवाद विद्यार्थियों में आधुनिक अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण रहे।

‘स्वर्ण अक्षर-2026’ के समापन समारोह में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन सहित बीएचईएल के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी डीपीएस रानीपुर की उपलब्धियों और आयोजन की सराहना की। मुख्य सचिव ने विद्यालय की पांच दशक की यात्रा को उल्लेखनीय बताते हुए विद्यार्थियों की प्रतिभा की प्रशंसा की। अतिथियों की ओर से प्रधानाचार्य डॉ. अनुपम जग्गा के नेतृत्व और विद्यालय की कार्यसंस्कृति की सराहना इस बात का संकेत रही कि डीपीएस रानीपुर की पहचान केवल शैक्षणिक परिणामों तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक व्यक्तित्व निर्माण से जुड़ी है।

डॉ. अनुपम जग्गा के नेतृत्व में विद्यालय लगातार इस दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है कि विद्यार्थी केवल अच्छे अंक प्राप्त करने वाले छात्र न बनें, बल्कि साहित्य को समझें, संस्कृति से जुड़ें, प्रश्न पूछें, अपनी बात प्रभावी ढंग से रखें और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पहचानें।

स्वर्ण जयंती वर्ष की शुरुआत के साथ डीपीएस रानीपुर ने आने वाले समय के लिए भी अपनी दिशा स्पष्ट कर दी है। वर्षभर प्रस्तावित विभिन्न कार्यक्रमों के बीच विद्यालय की उपलब्धियों की यह यात्रा आगे बढ़ेगी। ऐसे में डॉ. अनुपम जग्गा का नेतृत्व विद्यालय की पांच दशक पुरानी विरासत को नई ऊर्जा और नई दृष्टि देने वाली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आता है।

डीपीएस रानीपुर की स्वर्णिम यात्रा अब केवल अतीत का गौरव नहीं, बल्कि भविष्य के नए कीर्तिमानों की तैयारी भी है—और इस यात्रा में नेतृत्व की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।