मोहान वन क्षेत्र में बाघ को पकड़ने के लिए लगाए 7 पिंजरे, 35 कैमरों से की जा रही निगरानी






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न्यूज 127, अल्मोड़ा
मोहान वन क्षेत्र के ग्राम सभा डबरा सौराल, तड़म और काठ की नाव क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने निगरानी और बाघ रेस्क्यू अभियान तेज कर दिया है। उप प्रभागीय वनाधिकारी रानीखेत द्वारा गठित टीमें लगातार संवेदनशील क्षेत्रों में कैंप कर रही हैं और बाघ की गतिविधियों को ट्रैक कर उसे रेस्क्यू करने का प्रयास किया जा रहा है।

एसडीओ वन विभाग काकुल पुंडीर ने बताया कि क्षेत्र में लगातार गश्त एवं निगरानी के साथ ग्रामीणों को वन्यजीवों से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। ग्राम सभा डबरा सौराल और सौराल के रास्तों एवं पगमार्गों पर झाड़ियों की कटाई भी कराई जा रही है, ताकि आवाजाही के दौरान ग्रामीणों को संभावित खतरे से बचाया जा सके।

वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में सात पिंजरे लगाए हैं। बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए दो ड्रोन, दो लाइव कैमरे और 33 कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। वन विभाग की टीमें नियमित रूप से पिंजरों, कैमरा ट्रैप और अन्य उपकरणों की जांच कर रही हैं।

क्षेत्र में गश्त के दौरान टीमों द्वारा छह एनाइडर, सात फॉक्स लाइट, राइफल और गांधी बंदूक जैसे सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रेस्क्यू टीम बाघ की गतिविधियों को लगातार ट्रैक कर उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने की कोशिश में जुटी है।

वन क्षेत्राधिकारी मोहान के नेतृत्व में टीम ने ग्रामीणों से संवाद कर उन्हें सावधानियों की जानकारी दी। वन विभाग की निगरानी में स्कूली विद्यार्थियों को सुरक्षित स्कूल पहुंचाया गया। संवेदनशील क्षेत्रों में वन्यजीवों के पगमार्ग और अन्य गतिविधियों की पहचान भी की जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्टर लगाने के साथ लाउडस्पीकर के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके अलावा जनजागरूकता गोष्ठियां आयोजित कर लोगों से अकेले जंगल की ओर न जाने, सतर्क रहने और बाघ की गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने की अपील की जा रही है।

बाघ रेस्क्यू अभियान में कॉर्बेट की विशेषज्ञ टीम का भी सहयोग लिया जा रहा है। चिकित्सकों की टीम रेस्क्यू दल के साथ लगातार अभियान में जुटी है। गश्त, निगरानी और जनजागरूकता के लिए रामनगर वन प्रभाग, कालागढ़ टाइगर रिजर्व तथा अल्मोड़ा वन प्रभाग की रानीखेत, जौरासी, द्वाराहाट और अल्मोड़ा रेंज की टीमें क्षेत्र में कैंप कर सहयोग कर रही हैं।

वन विभाग का कहना है कि प्राथमिकता बाघ को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए संवेदनशील इलाकों में निगरानी और गश्त लगातार जारी रहेगी।