भल्ड के ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना, जलसमाधि की चेतावनी से प्रशासन की बढ़ी चिंता






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न्यूज 127, उत्तरकाशी।
तहसील चिन्यालीसौड़ के अंतर्गत ग्राम सभा भल्ड के ग्रामीण गांव की सुरक्षा और प्रस्तावित विस्थापन की मांग को लेकर 11 अगस्त से झील किनारे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। ग्रामीणों की जलसमाधि की चेतावनी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव संभावित खतरे की जद में है और इस संबंध में पूर्व में संबंधित विभागों द्वारा रिपोर्ट भी तैयार की जा चुकी है, लेकिन अब तक रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है।

ग्रामीणों के अनुसार, गांव के विस्थापन की मांग को लेकर वे इससे पहले भी दो बार अनिश्चितकालीन आंदोलन कर चुके हैं। हर बार शासन-प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से उनकी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद धरातल पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इससे ग्रामीणों में लगातार असंतोष बढ़ता जा रहा है।

अब ग्रामीणों ने एक बार फिर आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो वे जलसमाधि जैसे आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होंगे। इस चेतावनी के बाद प्रशासन के सामने आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कराने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि संबंधित विभाग गांव की स्थिति को लेकर पहले ही रिपोर्ट तैयार कर चुके हैं तो उसे सार्वजनिक करने और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने में देरी क्यों की जा रही है। उनका कहना है कि मामला केवल विस्थापन का नहीं, बल्कि उनके परिवारों की सुरक्षा, पुनर्वास और भविष्य से जुड़ा है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि अपने परिवारों और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा को लेकर किया जा रहा है। उनका कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद यदि निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए बहुजन समाज पार्टी टिहरी गढ़वाल के जिलाध्यक्ष भी ग्रामीणों के बीच पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उनकी विस्थापन की मांग का समर्थन किया। उन्होंने प्रशासन से ग्रामीणों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर उचित समाधान निकालने की मांग की। फिलहाल ग्रामीण झील किनारे अनिश्चितकालीन धरने पर डटे हुए हैं।