महिलाओं से बदसलूकी, अवैध वसूली और रास्ते बंद करने का आरोप
हरिद्वार
हरिद्वार जनपद की खानपुर वन रेंज में तैनात रेंजर पर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खानपुर रेंज क्षेत्र में यदि कोई महिला या पुरुष जंगल से सूखी लकड़ी लेने जाता है, तो रेंजर द्वारा उनके साथ बदसलूकी की जाती है, गंदी-गंदी गालियां दी जाती हैं और अवैध रूप से पैसे की मांग की जाती है।
ग्रामीणों के अनुसार जंगल में लालटेन की लकड़ी मुफ्त काटने का प्रावधान है, इसके बावजूद गरीब ग्रामीणों से अवैध वसूली की जा रही है। आरोप है कि जो रास्ते पिछले 50 से 100 वर्षों से ग्रामीणों द्वारा उपयोग में लाए जा रहे थे, उन्हें अचानक बंद कर दिया गया है। इन रास्तों से गुजरने वाले लोगों पर मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं, कर्मचारियों के माध्यम से अपमानित किया जा रहा है और मारपीट तक की जा रही है।
किसानों का कहना है कि खेतों में जंगली जानवरों द्वारा फसलों को होने वाले नुकसान की सूचना देने पर भी उन्हें मदद मिलने के बजाय उल्टा धमकाया जाता है। क्षेत्र में हाथी, गुलदार और तेंदुए जैसे जंगली जानवरों की आवाजाही लगातार बनी हुई है, जिसकी सूचना बार-बार देने के बावजूद रेंजर द्वारा फोन तक नहीं उठाया जाता। ग्रामीणों का आरोप है कि रेंजर यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि उनके पास समय नहीं है और उन्हें अपने अन्य “महत्वपूर्ण” काम निपटाने हैं।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि खानपुर रेंज क्षेत्र में प्रभावशाली लोगों के फार्म हाउस जंगल के बीचों-बीच बनाए गए हैं, जिनके लिए विशेष रास्ते खोल दिए गए हैं। वहीं दूसरी ओर, गांव के गरीब लोग जो जंगल से लकड़ी बीनने जाते थे, उनके रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। महिलाओं और बच्चों को धमकाने तथा मारपीट करने के भी आरोप लगाए गए हैं।
रास्ते बंद होने से किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गन्ने से भरी बैलगाड़ी, ट्रॉली और ट्रैक्टर निकालने के मार्ग बंद होने से खेती-किसानी प्रभावित हो रही है और आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रभागीय वन अधिकारी, हरिद्वार से मांग की है कि खानपुर रेंज में तैनात रेंजर के खिलाफ मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से उन्हें पद से हटाकर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
डीएफओ स्वप्निल अनिरूद्ध से इस पूरे प्रकरण में उनका पक्ष जानने का प्रयास किया। दो बार फोन किया लेकिन फोन नही उठ पाया। जिसके चलते उनका वर्जन नही आया है।




