न्यूज 127, मेरठ/मुजफ्फरनगर।
शहर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार शर्मा ने अपने कर्म, व्यवहार और कर्तव्य-परायणता से आम जनता के दिलों में एक खास जगह बनाई है। मुजफ्फरनगर के इस संवेदनशील कोतवाली क्षेत्र की कमान संभालते हुए उन्होंने न केवल कानून-व्यवस्था को पटरी पर रखा, बल्कि जनसमस्याओं को प्राथमिक आधार पर हल कर सामुदायिक पुलिसिंग (कॉम्प्लेक्स-कम्युनिटी पुलिसिंग) की नई मिसाल कायम की है। बृजेश कुमार शर्मा पुलिस सेवा को महज एक नौकरी नहीं, बल्कि जनसेवा और राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च माध्यम मानते हैं।
मानवीय संवेदनाएं और त्वरित न्याय
प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार शर्मा की सबसे बड़ी कार्यकुशलता यह रही है कि उन्होंने खाकी की सख्त ड्यूटी के साथ मानवीय संवेदनाओं को सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता दी। थाने पहुंचने वाला पीड़ित किसी भी वर्ग का हो, उसकी बात सम्मानपूर्वक सुनी जाती है और त्वरित व न्यायसंगत कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। इसी व्यवहार कुशलता के चलते स्थानीय निवासी बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं उन तक पहुंचाते हैं।
अपराध नियंत्रण और जनसंवाद पर जोर
शहर कोतवाली क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए उन्होंने क्षेत्रीय नागरिकों, व्यापारियों, समाजसेवी संगठनों और युवाओं के साथ निरंतर संवाद स्थापित रखा। इससे पुलिस और जनता के बीच की दूरी समाप्त हुई और मुखबिर तंत्र मजबूत हुआ। उनके इस रणनीतिक प्रयास से न केवल गंभीर अपराधों पर अंकुश लगा, बल्कि आम नागरिकों में पुलिस प्रशासन के प्रति विश्वास और भी गहरा हुआ।
सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज हैं सफलता के कई अध्याय
शहर कोतवाली से पूर्व वे जिन भी थानों व जनपदों में तैनात रहे, वहां भी उनका ट्रैक रिकॉर्ड बेदाग और सराहनीय रहा है। कानून-व्यवस्था की कठिन चुनौतियों का सामना उन्होंने संयम, धैर्य और त्वरित रणनीति के साथ किया। उनके पूरे सेवाकाल में पद व वर्दी का उपयोग केवल जनहित और समाज सुधार में हुआ, जिससे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भी उनके कार्यों की बारंबार सराहना की गई है।
युवा पुलिसकर्मियों के लिए बने प्रेरणास्रोत
निष्ठा, अनुशासन और निष्पक्षता के साथ दायित्वों का निर्वहन करने वाले बृजेश कुमार शर्मा की छवि एक आदर्श पुलिस अधिकारी के रूप में स्थापित हुई है। उनका यह अनुकरणीय कार्य न केवल वर्तमान पुलिस तंत्र को मजबूती दे रहा है, बल्कि विभाग में आने वाले युवा पुलिसकर्मियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बना हुआ है। वास्तव में, ऐसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी ही ‘पुलिस सेवा’ को सच्चे अर्थों में ‘लोक सेवा’ की परिभाषा देते हैं।








