यह मंजिल नहीं नई शुरुआत, अब डिजिटल और वित्तीय साक्षरता पर जोर: मुख्यमंत्री




Listen to this article

न्यूज 127, देहरादून। उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए देश के छठवां पूर्ण साक्षर राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है। मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद उत्तराखंड यह उपलब्धि हासिल करने वाला देश का छठवां राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि को प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गौरव का विषय बताते हुए शिक्षकों, विद्यार्थियों, नव-साक्षरों, स्वयंसेवकों और अभियान से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी।
मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने वाले नव-साक्षरों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों और दूरस्थ क्षेत्रों वाले उत्तराखंड में पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य हासिल करना प्रदेशवासियों की दृढ़ इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयास का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड ने यह उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि पूर्ण साक्षर राज्य बनना केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश को और आगे ले जाने के संकल्प को मजबूत करने वाला अवसर है।

सीखने की कोई उम्र नहीं
नव-साक्षरों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने साबित किया है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और आगे बढ़ने में कभी देर नहीं होती। शिक्षा व्यक्ति को आत्मविश्वास देने के साथ नए अवसरों के द्वार खोलती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साक्षरता का अर्थ केवल पढ़ना-लिखना या हस्ताक्षर करना नहीं है। अपने अधिकारों और कर्तव्यों की समझ, डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता तथा जीवनोपयोगी कौशल भी साक्षरता के महत्वपूर्ण अंग हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शिक्षा को समावेशी और आधुनिक बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। एक शिक्षित व्यक्ति न केवल अपने जीवन में बदलाव लाता है, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी योगदान देता है।

500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान दे रही है। नंदा गौरा योजना के माध्यम से पात्र छात्राओं को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। राज्य के 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम और सेंट्रल स्टूडियो की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश में 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना के माध्यम से अनाथ बच्चों की निःशुल्क शिक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

इसके अलावा हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के 100-100 विद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

अब डिजिटल और वित्तीय साक्षरता पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ण साक्षरता को अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि नई शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए। अब प्रदेश में डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, स्वास्थ्य जागरूकता और जीवन कौशल को प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक के साथ प्रत्येक नागरिक कदम से कदम मिलाकर चले और तकनीक का उपयोग अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए कर सके, इसके लिए सरकार लगातार प्रयास करेगी।

25 हजार स्वयंसेवकों ने निभाई भूमिका
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने पूर्ण साक्षर राज्य बनने की महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने बताया कि अभियान को सफल बनाने में करीब 25 हजार स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब अगले छह माह में राज्य को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित है और उत्तराखंड इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। जिस गांव में एक भी बच्चा पढ़ने वाला होगा, वहां विद्यालय बंद नहीं किया जाएगा।

कार्यक्रम में विधायक सविता कपूर, अपर सचिव भारत सरकार अर्चना शर्मा अवस्थी, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव नमामि बंसल सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।