न्यूज 127. मेरठ।
मेरठ नर्सिंग होम एसोसिएशन, स्कूल संचालक, व्यापारी और स्थानीय महिलाएं शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट (स्कीम नंबर-7) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 44 सील परिसरों को ध्वस्त करने के आदेश के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन कर रही है। कई नर्सिंग होम भी इस कार्रवाई की जद में आ गए हैं। इन्हें बचाने के लिए एसोसिएशन ने कमिश्नरी पार्क में प्रर्दशन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा।
सीएम के नाम ज्ञापन: मेरठ नर्सिंग होम एसोसिएशन ने कहा कि उनकी प्रार्थना पर सहानुभूति विचार विमर्श करने के बाद न्याय दिलाया जाये। आवास व विकास परिषद एवं मेरठ विकास प्राधिकरण के अन्तर्गत अनेक योजनाओं में 1980 से 2010 तक देश में नर्सिंग होम संचालित करने के लिये कोई भी भूमि आवंटित नहीं की गयी थी।
सरकार से की जा रही विनती: आबादी के बढ़ते दबाव व समय की आवश्यकता के कारण क्लीनिक, छोटे नर्सिंग आबादी के नजदीक सुलभ एवं सस्ती चिकित्सा दिलाने के लिये संचालित होने लगे। उत्तर प्रदेश से लगातार विनती की गयी तथा पूरे उत्तर प्रदेश के इस तरह की समस्याओं से सरकार को अवगत कराया गया तथा सभी नर्सिंग होम्स को नियमित (Regulise) करने की प्रार्थना की गयी।
अचानक रोका जा रहा: संचालकों का कहना है कि सभी नर्सिंग होम्स किसी सरकारी एवं अवैध भूमि पर नहीं बने। सभी नर्सिंग होम्स 40 वर्ष पूर्व से संचालित एवं सुचारू से चल रहे हैं। आबादी के अनुसार जनसेवा सुलभ चिकित्सा सस्ते दरों पर दे रहे हैं तथा जन कल्याण आबादी के नजदीक कर रहे हैं। अब अचानक 20-25 वर्ष संचालित नर्सिंग होम्स पर सीलिंग व व्यवसाय करने से रोका जा रहा है।
यूपी सरकार ने दी थी राहत: सीएम को भेजे ज्ञापन में कहा गया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने समय की डिमाँड को पहचानते हुए वर्ष 2011 व 2012 परिपत्र संख्या 2593/8.3.12.5 दिनांक 18.11.2012 द्वारा आवासीय क्षेत्रों में नर्सिंग होम्स के लिये भूखण्ड का न्यूनतम क्षेत्रफल 300 मीटर व 12 मीटर चौड़ी मार्ग पर Deemed Permissible माना जायेगा। मिश्रित आबादी में नर्सिंग होम्स संचालित के लिये मेरठ महायोजना 2021 एवं 2031 में कहा गया है। उत्तर प्रदेश की 2025 शहरी नियोजन एवं उपनिधि से भी इसको कहा गया है तथा भू परिवर्तन कराके आवासीय प्लॉट को कमर्शियल व नर्सिंग होम्स में चेंज करा सकते हैं।
नर्सिंग होम पर मौजूद एनओसी: ज्ञापन में कहा गया कि सभी नर्सिंग होम्स के पास फायर सेफ्टी के लिये उपकरण व फायर एन0ओ0सी0 हैं। सभी नर्सिंग होम्स नगर निगम लाईसेंस की फीस 5000-10000 रूपये प्रतिवर्ष दे रहे हैं। सभी नर्सिंग होम्स कमर्शियल में हाउस टैक्स, बिजली बिल, पानी एवं सीवर का कमर्शियल टैक्स दे रहे हैं। सभी नर्सिंग होम्स प्रदूषण (Pollution Authorisation) एवं वेस्ट निवारण शासन की नीति के अनुसार कर रहे हैं। सभी नर्सिंग होम्स मेरठ मुख्य चिकित्साधिकारी के यहां पंजीकृत हैं तथा उत्तर प्रदेश के रजिस्ट्रेशन पोर्टल से पंजीकृत है जिसमें आवासीय एवं कमर्शियल की कोई बाध्यता नहीं हैं।
280 नर्सिंग होम हैं पंजीकृत: ज्ञापन में कहा गया कि अवगत कराया जाता है कि मेरठ में 280 नर्सिंग होम्स मुख्य चिकित्साधिकारी में पंजीकृत हैं जिसमें 160-170 के करीब नर्सिंग होम्स आवासीय भूमि पर है व 30-80 नर्सिंग होम्स कमर्शियल भूमि पर हैं, जिनमें भी सेटबैक की समस्या है ऐसे केवल 10 प्रतिशत नर्सिंग होम्स नर्सिंग होम नक्शे पर बने हैं। मेरठ 15 लाख की आबादी में अचानक 170-180 नर्सिंग होम्स बन्द होने हाहाकार एवं आक्रोश मच जायेगा और सभी नर्सिंग होम्स में 50-100 स्टॉफ काम करते हैं। हजारों की संख्या में बेरोजगार हो जायेंगे।
सीएम से विनती: ज्ञापन में सीएम से विनती की गई है कि 21 सितम्बर की नयी तारीख सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई तक अन्य योजनाओं में कोई कार्यवाही न करें। सुप्रीम कोर्ट में Review Petition या अपनी बात रखने के लिये पूर्ण समय दिया जाये अन्यथा अन्याय होगा। चिकित्सा पूर्ण व्यवसायिक नहीं है इसमें जनसेवा है।
विरोध का कारण: सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में 44 सील किए गए परिसरों को गिराने (ध्वस्तीकरण) का सख्त आदेश दिया है। इस आदेश के बाद नर्सिंग होम, स्कूलों और दुकानों के संचालकों में अपना रोजगार और भवन उजड़ने का डर बैठ गया है।
कमिश्नरी पर भारी हंगामा: शनिवार (18 जुलाई 2026) को सैकड़ों की संख्या में नर्सिंग होम व स्कूल संचालक, व्यापारी और महिलाएं एकत्र होकर कमिश्नरी कार्यालय के बाहर धरना देने पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने मुख्य गेट बंद कर दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने गेट पर ही डेरा डाल दिया।
मुख्यमंत्री को ज्ञापन: प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (CM) को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित हो रहे लोगों के लिए मानवीय आधार पर अगली तारीख तक राहत या बीच का रास्ता निकालने की मांग की है।
माहौल हुआ भावुक: प्रदर्शन के दौरान कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ शामिल हुईं। व्यापारियों का कहना है कि यदि यह ध्वस्तीकरण हुआ तो कई लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।




