उत्तराखण्ड की विकास यात्रा में गोर्खाली समाज का अहम योगदान: मुख्यमंत्री










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न्यूज 127, देहरादून।
जसवंत सिंह ग्राउंड, गढ़ी कैंट में रविवार को आयोजित गोर्खाली महिला हरितालिका तीज उत्सव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हरितालिका तीज उत्सव को भविष्य में सरकारी स्तर पर और अधिक भव्य रूप से आयोजित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने गोर्खाली समाज की माताओं-बहनों को तीज पर्व की शुभकामनाएं देते हुए उनके सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरितालिका तीज माता पार्वती की अटूट तपस्या, विश्वास, समर्पण और शक्ति का प्रतीक है। यह पर्व समाज को दृढ़ संकल्प और विश्वास के साथ लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि तीज जैसे पारंपरिक पर्व हमारी नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। माताएं और बहनें संस्कृति, भाषा, लोक परंपराओं और संस्कारों की सबसे बड़ी संरक्षक हैं। उनके प्रयासों से सांस्कृतिक विरासत पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही है।

गोर्खा समाज की वीरता और राष्ट्रभक्ति को किया नमन
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोर्खाली समाज अपनी वीरता, निष्ठा, परिश्रम और राष्ट्रभक्ति के लिए देशभर में जाना जाता है। देश की सीमाओं की रक्षा में गोर्खा वीरों ने सदैव अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया है। राष्ट्र के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की समाज की भावना पर पूरे देश को गर्व है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की विकास यात्रा में भी गोर्खाली समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। शिक्षा, खेल, कला-साहित्य, समाज सेवा समेत विभिन्न क्षेत्रों में समाज के लोगों ने परिश्रम और ईमानदारी के साथ प्रदेश की प्रगति में योगदान दिया है।

शहीद द्वार बनेगा शौर्य और बलिदान का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि मसूरी विधानसभा क्षेत्र में अमर शहीद कप्तान दल बहादुर थापा की स्मृति में बनने वाले ‘आजाद हिन्द फौज शहीद द्वार’ का शिलान्यास भी किया गया है। यह शहीद द्वार गोर्खा समाज के अदम्य शौर्य, त्याग और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बनने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों को उनके बलिदान और देशसेवा से परिचित कराने का कार्य करेगा।

भारत-नेपाल के संबंध केवल पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं
मुख्यमंत्री ने भारत और नेपाल के आत्मीय संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच केवल पड़ोसी राष्ट्रों का रिश्ता नहीं है, बल्कि सदियों पुराने सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र से होने के कारण उन्होंने भारत और नेपाल के बीच साझा संस्कृति, आत्मीयता और परस्पर जुड़ाव को निकटता से महसूस किया है। नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा पर संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत नेपाल के साथ खड़ा है। उन्होंने आपदा प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए नेपाल के जल्द इस संकट से उबरने की कामना की।

महिला सशक्तीकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति का सशक्तीकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है। वहीं, उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू कर महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में तीन लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। ये महिलाएं स्वयं आत्मनिर्भर होने के साथ ही अपने परिवार और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मातृशक्ति के सशक्तीकरण, सम्मान और कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, आचार्य बालकृष्ण, गीता पुष्कर धामी, गोर्खाली सुधार सभा के अध्यक्ष पदम सिंह थापा, गोर्खाली महिला हरितालिका तीज उत्सव कमेटी की अध्यक्ष प्रभा शाह, गोरखा कल्याण परिषद की अध्यक्ष ज्योति कोटिया, नेहा जोशी, सिद्धार्थ अग्रवाल, अनुकृति गुसाईं सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।