हरिद्वार में क्लाउड किचन के तीसरे बैच का प्रशिक्षण संपन्न, 100 से अधिक महिलाएं घर से शुरू कर चुकी हैं रोजगार
न्यूज 127, हरिद्वार।
घर की रसोई में पकने वाले व्यंजनों की खुशबू अब महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तीकरण की नई राह खोल रही है। जिस रसोई को अब तक परिवार की जरूरतों तक सीमित माना जाता था, वही रसोई अब रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता का मजबूत माध्यम बन रही है। हरिद्वार में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र की दूरदर्शी पहल ‘खाने से खजाना, रसोई से रोजगार’ महिलाओं के सपनों को नई उड़ान देने के साथ उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर प्रदान कर रही है।
मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के अंतर्गत क्लाउड किचन की यह पहल महिलाओं को पारंपरिक पाककला से आगे बढ़कर आधुनिक डिजिटल कारोबार की दुनिया से जोड़ रही है। इस अभियान के सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं। अब तक 30 महिलाएं अपने घरों से ही रोजगार शुरू कर चुकी हैं। यह उपलब्धि बताती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिलें तो घर की चारदीवारी के भीतर छिपा हुनर भी परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने का आधार बन सकता है।
तीसरे बैच की महिलाओं ने सीखा हुनर को कारोबार में बदलने का मंत्र
शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार स्थित मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के स्पोक सेंटर में छह दिवसीय क्लाउड किचन उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे बैच का समापन हुआ। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं को प्रमाणपत्र वितरित किए और उन्हें अपने हुनर को सफल व्यवसाय में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने न केवल अपने पाककला कौशल को निखारा, बल्कि यह भी जाना कि अपने व्यंजनों को बाजार तक कैसे पहुंचाया जाए, ग्राहकों का भरोसा कैसे जीता जाए और घर बैठे कारोबार को कैसे आगे बढ़ाया जाए। प्रशिक्षण के छह दिनों के अनुभव साझा करते हुए महिलाओं ने इस पहल को अपने जीवन में बदलाव लाने वाला अवसर बताया। उनके भीतर अपने हुनर को पहचानने, उसे व्यावसायिक रूप देने और भविष्य में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिखाई दिया।
डिजिटल प्लेटफॉर्म बनेंगे घर की रसोई की ताकत
आज के डिजिटल दौर में स्वादिष्ट भोजन तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सही ग्राहकों तक पहुंचाना भी जरूरी है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण में महिलाओं को गूगल बिजनेस प्रोफाइल के माध्यम से अपने कारोबार को ऑनलाइन दर्ज करने, गूगल मानचित्र पर अपनी पहचान बनाने और स्विगी व जोमैटो जैसे मंचों पर कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप बिजनेस के माध्यम से व्यंजनों का प्रचार करने, ग्राहकों से संपर्क स्थापित करने और ऑनलाइन ऑर्डर प्राप्त करने के तरीके भी समझाए गए। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल भोजन बनाने तक सीमित न रखकर उन्हें अपने ब्रांड की पहचान बनाने वाली डिजिटल उद्यमी के रूप में तैयार करना है।
प्रशिक्षण के बाद भी मिलेगा मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग
मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण के साथ-साथ कारोबार स्थापित करने में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करना भी जरूरी है। इसी सोच के तहत प्रशिक्षण के बाद भी मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना की टीम महिलाओं को उद्यम पंजीकरण, आवश्यक खाद्य लाइसेंस और अन्य जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने में सहयोग करेगी।
महिलाओं को कारोबार शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए सामुदायिक निवेश कोष, सामुदायिक ऋण तथा ग्राम संगठन के माध्यम से उपलब्ध वित्तीय सहायता के विकल्पों से भी जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। इससे महिलाओं को अपने व्यवसाय की शुरुआत के लिए जरूरी संसाधन जुटाने में मदद मिल सकेगी।
महिलाओं के आत्मविश्वास को मिली नई उड़ान
छह दिवसीय प्रशिक्षण के समापन पर महिलाओं ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें अपने हुनर की व्यावसायिक उपयोगिता समझने और रोजगार के नए अवसरों को पहचानने का मौका मिला है। घर से काम शुरू करने की संभावना उनके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे वे पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक गतिविधियों में भी भागीदारी कर सकती हैं।
कार्यक्रम में आरसेटी के निदेशक शिव कुमार, अग्रणी जिला बैंक प्रबंधक दिनेश कुमार गुप्ता, मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के प्रतिनिधि राव आशकर, इंक्यूबेशन प्रबंधक योगेंद्र सिंह, राव साकिब, गीता सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, कर्मचारी और प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाएं उपस्थित रहीं।
हरिद्वार में क्लाउड किचन की यह पहल महिला सशक्तीकरण को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बनकर उभर रही है। डॉ. ललित नारायण मिश्र की पहल का मूल संदेश स्पष्ट है—महिलाओं के पास हुनर है, जरूरत है उसे सही दिशा, बाजार और अवसर देने की। जब घर की रसोई रोजगार का केंद्र बनेगी, तब महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने के साथ परिवारों की खुशहाली और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।


