नई दिल्ली/देहरादून।
देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम माने जा रहे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लागू होने के बाद अब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति में व्यापक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। यह कानून लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करेगा, हालांकि इसका प्रभाव जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही पूर्ण रूप से दिखाई देगा।
उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव तय
देश के सबसे अधिक लोकसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 80 सीटें हैं। परिसीमन के बाद यह संख्या बढ़कर लगभग 120 से 130 तक पहुंच सकती है। ऐसे में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने पर करीब 40 से 43 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे राज्य की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अभूतपूर्व रूप से बढ़ेगी और नई महिला नेतृत्व की एक मजबूत पीढ़ी उभरकर सामने आएगी।
उत्तराखंड में भी दिखेगा असर
वहीं, उत्तराखंड में फिलहाल 5 लोकसभा सीटें हैं, जो परिसीमन के बाद बढ़कर 6 या 7 हो सकती हैं। ऐसे में 2 से 3 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होने की संभावना है। छोटे राज्य होने के बावजूद उत्तराखंड में यह बदलाव महिला नेतृत्व को नई दिशा देगा और पहाड़ी क्षेत्रों से भी सशक्त महिला प्रतिनिधित्व उभर सकता है।
रोटेशन सिस्टम रहेगा लागू
इस कानून की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि आरक्षित सीटें स्थायी नहीं होंगी। प्रत्येक चुनाव में इन सीटों का रोटेशन होगा, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा\
राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की आहट
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून के लागू होने से दोनों राज्यों में पारंपरिक राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। दलों को महिला उम्मीदवारों को प्राथमिकता देनी होगी, जिससे चुनावी रणनीतियों में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम
कुल मिलाकर, नारी शक्ति वंदन अधिनियम उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों ही राज्यों में महिला सशक्तिकरण को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला साबित हो सकता है। आने वाले वर्षों में इसका असर न केवल राजनीति बल्कि सामाजिक संरचना पर भी गहराई से दिखाई देगा।
“नारी शक्ति का नया युग” : यूपी और उत्तराखंड की राजनीति में आएगा बड़ा बदलाव




