तीन दिन तक डीपीएस रानीपुर में ज्ञान, साहित्य, कला, संगीत, नृत्य और भारतीय विरासत का अद्भुत संगम; विद्यार्थियों की प्रतिभा ने मोहा दर्शकों का मन
न्यूज 127, हरिद्वार।
पांच दशकों की गौरवशाली शैक्षणिक यात्रा के 50वें वर्ष में प्रवेश का उत्सव दिल्ली पब्लिक स्कूल रानीपुर में केवल समारोह बनकर नहीं रहा, बल्कि साहित्य, संस्कृति, कला, संगीत, भारतीय विरासत और विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा का ऐसा भव्य संगम बना, जिसने तीन दिनों तक पूरे विद्यालय परिसर को स्वर्णिम ऊर्जा से भर दिया। 8 से 10 सितंबर तक आयोजित तीन दिवसीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव ‘स्वर्ण अक्षर-2026—स्वर्णिम प्रवाह’ ने डीपीएस रानीपुर की पांच दशक की उपलब्धियों को याद करने के साथ नई पीढ़ी की प्रतिभा को भविष्य की दिशा देने का संदेश भी दिया।
महोत्सव का आरंभ पुस्तकों की दुनिया से हुआ। जूनियर विंग में आयोजित पुस्तक मेले में विद्यार्थियों और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कहानियों, जीवनियों, साहसिक साहित्य और विविध विषयों की पुस्तकों ने बच्चों को कल्पना, ज्ञान और जिज्ञासा से जोड़ा। इसके साथ ही स्वर्ण जयंती वर्ष की शुरुआत राष्ट्रगीत, स्वागत गीत और वाद्यवृंद की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से हुई। डीपीएस सोसाइटी नई दिल्ली के चेयरमैन वी.के. शुंगलू सहित प्रशासनिक, न्यायिक, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की अनेक विशिष्ट हस्तियों ने समारोह की गरिमा बढ़ाई।
प्रधानाचार्य डॉ. अनुपम जग्गा ने विद्यालय की पांच दशक की यात्रा, उपलब्धियों और उत्कृष्टता की परंपरा को सामने रखा। स्वर्ण जयंती पर तैयार विशेष वीडियो ने विद्यालय की स्थापना से वर्तमान तक के सफर, उपलब्धियों और पूर्व विद्यार्थियों की सफलताओं को भावनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों की साहित्यिक प्रतिभा को मंच देते हुए रस्किन बॉन्ड को समर्पित पुस्तक का विमोचन किया गया।
दूसरे दिन साहित्य और विरासत ने समारोह को नई ऊंचाई दी। मिडिल विंग के 39 सेक्शनों ने साहित्यिक भ्रमण के माध्यम से सुधा मूर्ति, रस्किन बॉन्ड, लुईस कैरोल, रोआल्ड डाहल, भारतेंदु हरिश्चंद्र, एपीजे अब्दुल कलाम, विलियम शेक्सपियर, मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद और जगदीश चंद्र माथुर जैसे साहित्यकारों और उनकी रचनाओं को जीवंत कर दिया। विद्यार्थियों, अभिभावकों और लेखकों की रचनाओं से सुसज्जित डिजिटल पुस्तक ‘द गोल्डन क्विल’ का लोकार्पण भी इसी साहित्यिक चेतना का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भारतीय इतिहास और परंपरा के रंग भी खूब दिखाई दिए। ‘मणिकर्णिका से रानी लक्ष्मीबाई’, ‘वीर गाथा’, संस्कृत नाटक ‘अष्टावक्र’, ‘द्रौपदी—नवरस स्वरूपा’ और भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बांधे रखा। शास्त्रीय संगीत कलाकारों मेहताब अली नियाजी, एस. आकाश और खुर्रम अली नियाजी की बाँसुरी, सितार और तबले की युगलबंदी ने वातावरण को सुरों से भर दिया। प्रेरक वक्ता पदमजीत सहरावत की ‘टॉकशाला’ ने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और चुनौतियों का साहस के साथ सामना करने की प्रेरणा दी।
तीसरे दिन मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की गरिमामयी उपस्थिति में महोत्सव का भव्य समापन हुआ। उन्होंने साहित्य की प्रासंगिकता बताते हुए कहा कि तकनीक उत्तर दे सकती है, लेकिन साहित्य बेहतर प्रश्न पूछना सिखाता है। उन्होंने डीपीएस रानीपुर की पांच दशक की उपलब्धियों और विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना की। बीएचईएल के निदेशक वित्त एवं मुख्य वित्तीय अधिकारी राजेश कुमार द्विवेदी ने डीपीएस रानीपुर और बीएचईएल की साझा विरासत को रेखांकित किया, जबकि कार्यपालक निदेशक रंजन कुमार ने विद्यालय की उत्कृष्टता, मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में योगदान की प्रशंसा की।
समापन समारोह साहित्य और संस्कृति के रंगों से सराबोर रहा। प्रख्यात कवि सतीश सृजन और कवयित्री वैष्णवी शर्मा की मौजूदगी ने आयोजन को साहित्यिक गरिमा प्रदान की। वैष्णवी शर्मा ने महाभारत के प्रसंगों को कविता के माध्यम से प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विद्यार्थियों के कठपुतली नृत्य, ‘नृत्य नवरस’, मुंबई से आए कथक दल द्वारा रामायण प्रसंगों की प्रस्तुति और रहस्य-रोमांच से भरपूर अंग्रेजी नाटक ने समापन को यादगार बना दिया।
‘स्वर्ण अक्षर-2026’ की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें अतीत की उपलब्धियों का गौरव और भविष्य की संभावनाओं का उत्साह एक साथ दिखाई दिया। पुस्तक से मंच तक, संस्कृत से आधुनिक रंगमंच तक और भारतीय शास्त्रीय परंपरा से विद्यार्थियों की आधुनिक रचनात्मकता तक—हर प्रस्तुति ने शिक्षा के व्यापक स्वरूप को सामने रखा।
प्रधानाचार्य डॉ. अनुपम जग्गा ने कहा कि स्वर्ण जयंती वर्ष का यह पहला आयोजन है और इसके बाद वर्षभर विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला जारी रहेगी। उन्होंने सभी अतिथियों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और मीडिया का आभार व्यक्त करते हुए विद्यालय को आगे भी उत्कृष्टता के पथ पर निरंतर अग्रसर रखने का संकल्प दोहराया।
तीन दिनों का यह ‘स्वर्ण अक्षर’ समारोह वास्तव में डीपीएस रानीपुर की पांच दशक की यात्रा को स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करने और आने वाली पीढ़ी के हाथों उस विरासत को और समृद्ध करने का उत्सव बन गया।








