ज्ञान भारतम मिशन से उत्तराखंड समेत समूचे भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को मिलेगा नया आयाम: त्रिवेन्द्र








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पथ प्रवाह, देहरादून/नई दिल्ली।
हरिद्वार के सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा लोकसभा में पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत देशभर में राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण संचालित किया गया है, जिसके माध्यम से अब तक 1.19 करोड़ से अधिक पाण्डुलिपियों की पहचान एवं प्रलेखन किया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मिशन के तहत सर्वेक्षण एवं भौतिक पंजीकरण के लिए कोई जिला-वार लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया था।

अपने उत्तर में मंत्री ने बताया कि ज्ञान भारतम वेब पोर्टल को आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीकों—जैसे ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR), हस्तलिखित पाठ पहचान (HTR), लिपि पहचान, सिमेंटिक सर्च, मशीन-असिस्टेड अनुवाद तथा भारतीयजीपीटी—से सशक्त बनाया गया है। इसके माध्यम से पाण्डुलिपियों का डिजिटलीकरण, लिप्यंतरण, अनुवाद और बहुभाषी अध्ययन अधिक सरल एवं प्रभावी होगा। साथ ही, “टॉक टू मैनुस्क्रिप्ट” और “पाण्डुलिपि दर्पण” जैसी सुविधाएं शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने यह भी बताया कि दुर्लभ पाण्डुलिपियों की डिजिटल प्रतियों तक पहुंच संबंधित कानूनों, संरक्षकों एवं अधिकार धारकों के अधिकारों के अनुरूप उपलब्ध कराई जाएगी। जहां कानूनी रूप से संभव होगा, वहां राष्ट्रीय डिजिटल भंडार (NDR) के माध्यम से इन्हें शोध एवं अध्ययन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि संवेदनशील अथवा अधिकार-संरक्षित सामग्री के लिए आवश्यक सुरक्षा एवं पहुंच संबंधी प्रावधान लागू रहेंगे।

सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से विश्व पटल पर स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि ज्ञान भारतम मिशन भारत की सांस्कृतिक चेतना, ज्ञान-विज्ञान और आध्यात्मिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने का राष्ट्रीय संकल्प है।

सांसद ने विशेष रूप से कहा कि उत्तराखंड देवभूमि सदियों से वेद, उपनिषद, योग, आयुर्वेद, ज्योतिष, शैव, वैष्णव एवं लोक परंपराओं की समृद्ध पाण्डुलिपियों का धनी रहा है। बदरीनाथ, केदारनाथ, जोशीमठ, हरिद्वार, ऋषिकेश तथा प्रदेश के अनेक प्राचीन मठों, मंदिरों और आश्रमों में संरक्षित दुर्लभ पाण्डुलिपियों का वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलीकरण और प्रलेखन समय की आवश्यकता है। ज्ञान भारतम मिशन इन अमूल्य धरोहरों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ वैश्विक शोध समुदाय तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनेगा।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी, शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा युवा पीढ़ी अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा से और अधिक गहराई से जुड़ सकेगी।