पथ प्रवाह, गोपेश्वर।
पिता की पुण्यतिथि को महज स्मरण दिवस बनाने के बजाय मानव सेवा का अवसर बनाते हुए प्राथमिक विद्यालय सुभाषनगर, गोपेश्वर की प्रधानाचार्य कुसुमलता डिडोयाल वृद्धाश्रम पहुंचीं। उन्होंने वहां रह रहे बुजुर्गों का हालचाल जाना और उन्हें कंबल एवं फल वितरित किए। इस दौरान उन्होंने बुजुर्गों के साथ आत्मीयता से समय बिताया और उनका आशीर्वाद लिया।
अपने स्वर्गीय पिता की पुण्यतिथि पर किए गए इस सेवा कार्य में भावनाओं के साथ सामाजिक सरोकार भी नजर आया। कुसुमलता डिडोयाल ने कहा कि माता-पिता की स्मृतियों को जीवंत रखने का सबसे सुंदर माध्यम जरूरतमंदों और बुजुर्गों की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की सेवा और उनके चेहरे पर मुस्कान लाना उनके लिए अपने पिता को सच्ची श्रद्धांजलि देने जैसा है।
उन्होंने कहा कि वृद्धजनों का स्नेह और आशीर्वाद जीवन की अनमोल पूंजी है। वृद्धाश्रम में बुजुर्गों से मुलाकात के दौरान उन्होंने उनकी आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी भी ली।
बुजुर्गों ने दिया स्नेह और आशीर्वाद
इस अवसर पर वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों ने भी कुसुमलता डिडोयाल को स्नेह और आशीर्वाद दिया। सेवा और आत्मीयता से भरे इस आयोजन ने पुण्यतिथि को केवल दिवंगत पिता की स्मृति तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे मानवता, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ दिया।
समाज में बुजुर्गों को अपनापन, सम्मान और भावनात्मक सहारा देने की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कुसुमलता डिडोयाल की पहल समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है। उनका यह प्रयास न केवल अपने पिता की स्मृति को सम्मान देता है, बल्कि अन्य लोगों को भी बुजुर्गों की सेवा और सम्मान के लिए प्रेरित करता है।




