‘पूनम की पाठशाला’ में शिक्षकों से संवाद, युवाओं में देशभक्ति, प्रभुभक्ति और सत्यनिष्ठा के संस्कार विकसित करने पर जोर
न्यूज 127, देहरादून।
डीएवी कॉलेज मैनेजिंग कमेटी एवं आर्य प्रादेशिक प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. पूनम सूरी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री और रोजगार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके माध्यम से विद्यार्थियों में संस्कार, चरित्र, नैतिकता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “यदि विद्या पर वेदों का अंकुश नहीं होगा तो वह विद्या नहीं, अविद्या होगी और ज्ञान नहीं, अज्ञान होगा।”

डॉ. पूनम सूरी मंगलवार को डीएवी पब्लिक स्कूल, देहरादून में आयोजित ‘पूनम की पाठशाला’ (संस्कारशाला) में शिक्षक-शिक्षिकाओं से संवाद कर रहे थे। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय एवं वैदिक जीवन-मूल्यों को शिक्षा से जोड़ने और नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने पर संवाद करना था।

विद्यालय पहुंचने पर प्रबंधन, शिक्षक-शिक्षिकाओं और विद्यार्थियों ने डॉ. पूनम सूरी का पुष्पवृष्टि तथा गढ़वाली लोकगीतों के साथ भारतीय परंपरा के अनुरूप स्वागत किया। इस अवसर पर पूनम सूरी, उत्तराखंड जोन-ए की प्रबंधक डॉ. अल्पना शर्मा और सहायक क्षेत्रीय अधिकारी पीसी पुरोहित मौजूद रहे।

डॉ. पूनम सूरी ने ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को अज्ञान से ज्ञान और नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि वैदिक ज्ञान की वास्तविक सार्थकता केवल तकनीकी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि मनुष्य के चरित्र निर्माण में है।

उन्होंने विद्यार्थियों के विचारों में निरंतरता और सकारात्मकता पर जोर देते हुए कहा कि जिस प्रकार बहता हुआ जल स्वच्छ रहता है, उसी प्रकार विचारों का निरंतर प्रवाह व्यक्ति के व्यक्तित्व को निर्मल और जीवंत बनाए रखता है। आज के युवाओं के विचारों को सही दिशा देना शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि डीएवी संस्थाओं से जुड़े शिक्षक ‘सत्यार्थ प्रकाश’ के विचारों से प्रेरणा लेते हैं। सत्य को आचरण, व्यवहार और विचारों का आधार बनाकर विद्यार्थियों में भी सत्यनिष्ठा के संस्कार विकसित किए जाने चाहिए। उन्होंने युवाओं में देशभक्ति और प्रभुभक्ति की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में डॉ. अल्पना शर्मा ने डॉ. पूनम सूरी का आभार व्यक्त करते हुए वैदिक मार्ग के निरंतर अनुसरण और आत्ममंथन की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में शामिल शिक्षक-शिक्षिकाओं ने इसे शिक्षा के साथ संस्कारों को जोड़ने की दिशा में प्रेरणादायी संवाद बताया।


