नैनीताल एसएसपी कार्यालय प्रकरण पर आईपीएस व पीपीएस एसोसिएशनों की कड़ी प्रतिक्रिया, अभद्र आचरण की एक स्वर में निंदा








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देहरादून/नैनीताल।
नैनीताल में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में कांग्रेसियों के धरना-प्रदर्शन के दौरान कथित अभद्र व्यवहार और आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना पर उत्तराखंड के आईपीएस ऑफिसर्स एसोसिएशन, पीपीएस (रिटायर्ड) ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन तथा प्रांतीय पुलिस सेवा एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण, अनुचित और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है।

तीनों संगठनों द्वारा जारी अलग-अलग पत्रों में एक ही स्वर में कहा गया है कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन इसकी आड़ में किसी लोक सेवक के साथ गाली-गलौज, अभद्रता या सरकारी कार्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचाना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

लोकतंत्र में विरोध का अधिकार, लेकिन मर्यादा जरूरी
आईपीएस ऑफिसर्स एसोसिएशन के कार्यकारी सचिव बरिन्दरजीत सिंह ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और असहमति स्वाभाविक है, परंतु यह अधिकार किसी को भी सार्वजनिक संस्थानों की गरिमा भंग करने या अधिकारियों के प्रति अपमानजनक व्यवहार करने की अनुमति नहीं देता। एसोसिएशन ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं न केवल संबंधित अधिकारी का अपमान हैं, बल्कि पूरी पुलिस सेवा की संस्थागत गरिमा और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति भी गंभीर असम्मान दर्शाती हैं। राजनैति असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है। लेकिन असहमति की आड़ में अपमान और अभद्रता लोकतांत्रिक अधिकार नही है। इस घटना की घोर निंदा एवं कड़े शब्दों में भृत्सना की गई है।

पीपीएस (रिटायर्ड) एसोसिएशन ने जताई गहरी चिंता
वहीं पीपीएस (रिटायर्ड) ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश सिंह भंडारी ने भी इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जैसे संवेदनशील पद पर तैनात अधिकारी कानून-व्यवस्था, नागरिक सुरक्षा और संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके साथ अभद्र व्यवहार न केवल उनके मनोबल को प्रभावित करता है, बल्कि पूरी पुलिस व्यवस्था पर नकारात्मक असर डालता है।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन इसके नाम पर किसी अधिकारी को धमकाना, अपशब्द कहना या कार्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचाना पूरी तरह अनुचित है।

पीपीएस एसोसिएशन ने कहा—किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं
प्रांतीय पुलिस सेवा एसोसिएशन ने भी अपने बयान में कहा कि नैनीताल की घटना में जिस प्रकार से अभद्र भाषा और असम्मानजनक व्यवहार किया गया, वह निंदनीय है। एसोसिएशन ने जोर देकर कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोक सेवकों के पद, दायित्व और गरिमा का सम्मान बनाए रखना आवश्यक है।

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से अपील की कि वे अपनी असहमति और विरोध को संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त करें तथा प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखें।

संस्थागत गरिमा और कानून व्यवस्था पर असर
तीनों संगठनों ने यह भी चेताया कि इस प्रकार की घटनाएं यदि बार-बार होती हैं तो इससे प्रशासनिक ढांचे, कानून व्यवस्था और पुलिस बल के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी पक्षों से जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा की।

एक स्वर में निंदा, मर्यादा बनाए रखने की अपील
आईपीएस, पीपीएस (रिटायर्ड) और पीपीएस एसोसिएशनों ने एक स्वर में इस घटना की घोर निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में अधिकारों के साथ कर्तव्यों और मर्यादाओं का पालन भी उतना ही जरूरी है। सभी संगठनों ने समाज और राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे कानून, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते हुए अपने आचरण को मर्यादित रखें।