DAV स्कूल में वैदिक चेतना सम्मेलन में वेदों के प्रचार के साथ देश भक्ति का संचार




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नवीन चौहान.
डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल जगजीतपुर हरिद्वार में चेतना सम्मेलन बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में एक ओर जहां वेदों का प्रचार दिखा वहीं दूसरी ओर देशभक्ति का संचार भी दिखायी दिया। छात्र छात्राओं की शानदार प्रस्तुति ने सभी दर्शकों और अतिथियों का मन मोह लिया।

वर्ष 2015 में डीएवी प्रबन्धकर्तृ समिति नई दिल्ली के प्रधान पद्मश्री पूनम सूरी जी के निर्देशन में तत्कालीन प्रधानाचार्य पी सी पुरोहित जी ने जो वैदिक चेतना की मशाल डीएवी हरिद्वार के प्रांगण में जलाई थी, उस मशाल को वर्तमान प्रधानाचार्य मनोज कुमार कपिल निरंतर प्रकाशमान रखे हुए हैं। उसी के प्रकाश पुंज के नीचे दिनांक 21.10.2023 को डीएवी हरिद्वार में वैदिक चेतना सम्मेलन का आयोजन किया गया।

आधुनिक भारत के चिंतक तथा आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती जी के पद चिह्नों पर अग्रसर डीएवी संस्थान निरंतर समाज में नैतिक मूल्यों व भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए प्रयत्नरत है। इस सम्मेलन में बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों को भी भौतिक एवं पाश्चात्य संस्कृति से परे भारतीय संस्कृति से जोड़े रखने का अनूठा प्रयास किया गया। शिक्षा, संस्कार, संस्कृति एवं देश भक्ति का अनूठा संगम हुआ, वैदिक विचारों का खूब मंथन हुआ। पवित्र यज्ञ में वेद मंत्रोच्चारण से विद्यालय प्रांगण गुंजायमान हुआ।

’दीपक’… तमसो मा ज्योतिर्गमय.. वाली रोशनी है जिसका अर्थ है परमात्मा हमें अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाएं और हमारे प्रत्येक कार्य को सफल बनाएं। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं मंत्रोच्चारण से हुआ। दीप प्रज्वलन आर्य समाज के प्रबुद्ध विद्वान एवं कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपति डॉ0 दिनेश चंद्र शास्त्री, डॉ0 सुरेन्द्र शर्मा, मुख्यातिथि योगेश भट्ट, राज्य सूचना आयुक्त, उत्तराखण्ड सरकार, विशिष्ट अतिथि डॉ. मुकुल कुमार सती, अपर शिक्षा निदेशक, क्षेत्रीय विधायक आदेश चौहान, नित्यानंद स्वामी जी ने संयुक्त रूप से किया।

विद्यालय प्रमुख मनोज कुमार कपिल द्वारा मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, मुख्य वक्ता, हरिद्वार के प्रसिद्ध विद्यालयों के प्रधानाचार्य हरिद्वार के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य बीएमडीएवी की लीना भाटिया, डीपीएस फेरूपुर पूनम श्रीवास्तव, अचीवर्स होम के सरकार, माउंट जी लिटेरा के श्रीनिवास, श्रीराम विद्या मंदिर की बबीता श्रीनिवास, महर्षि विद्या मंदिर के श्री त्यागी, एसएम पब्लिक स्कूल के रमणीक शाह सूद तथा एमसीएस की मैडम बक्शी एवं अन्य सभी अतिथियों को समृद्धि सूचक तुलसी का पवित्र पौधा, वेद पुस्तिका एवं अंगवस्त्र से सभी अतिथियों को सम्मानित किया गया।

रात्रि में तारों के जगमगाहट के नीचे चित्रपटल (स्क्रीन डिस्प्ले) के माध्यम से उपस्थित गणमान्य अतिथि एवं दर्शक दीर्घा के द्वारा डीएवी गान गाया गया। सर्वप्रथम विद्यार्थियों ने ’देखकर आपका शुभ आगमन’ स्वागत गीत गाकर अतिथियों का सत्कार किया। गीत के बोल, लयबद्धता तथा संचालन कार्य संगीत शिक्षक हिमांशु गुप्ता द्वारा किया गया।

प्रधानाचार्य मनोज कपिल ने सभी अतिथियों का कार्यक्रम में आने हेतु सहृदय आभार व्यक्त कर स्वागत किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में यह भी बताया कि पिछले 8 वर्षों से वैदिक चेतना समारोह का आयोजन आर्य शिरोमणि प्रधान पद्मश्री पूनम सूरी जी के दिशा-निर्देशन में होता चला आ रहा है। अपने उद्बोधन में उन्होंने डीएवी संस्थान को बच्चों के चरित्र निर्माण का विशेष केंद्र बताते हुए इस संस्था से निर्मित महान विभूतियों के विषय में भी जानकारी दी।

वैदिक चेतना समारोह की पहली कड़ी कक्षा चार के विद्यार्थियों द्वारा स्वागत नृत्य ’मुस्कुराए ये हवा सुहाने मौसम में खिल रहा है मन आपका स्वागत है’ प्रस्तुत किया गया। नृत्य का संचालन नृत्य शिक्षिका दीपमाला शर्मा ने किया। कार्यक्रम में आमंत्रित वक्ता सुरेंद्र शर्मा जी आर्य समाज के प्रचारक ने अभिभावकों से अपने बच्चों में आर्य समाज के महान व्यक्तित्वों के बारे में बताते हुए उनमें देशभक्ति के गुणों का संचार कर उन्हें दयानंद, हंसराज, श्रद्धानंद बनाने की मांग की तथा वेद तथा वेदों का महत्व बताते हुए आध्यात्मिकता तथा वैदिक संस्कृति से जोड़ने का अनुरोध किया।

नियमों का जीवन में होना अत्यंत आवश्यक है। इन नियमों का पालन जीवन को श्रेष्ठ मार्ग पर अग्रसर करता है। आर्य समाज के नियमों का पालन करना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है। डीएवी संस्थान इन नियमों का बीजारोपण करती है इसका प्रमाण कक्षा एक के नन्हे मुन्नों के कंठ स्वर हैं जिन्होंने गायत्री मंत्र और आर्य समाज के नियमों द्वारा कर्म सिद्धांत का बखान करके उपर्युक्त कथन को सार्थक बनाया। साथ-ही-साथ कक्षा दो के नन्हे पुष्पों ने शांति पाठ एवं तीन प्रमुख वेद मंत्र उच्चारण करके वातावरण को अत्यंत पावन एवं सुगंधित बना दिया।

पहले मंत्र ओउम् विश्वानि देव में बच्चों ने ईश्वर के गुणों की स्तुति की तथा ईश्वर के गुणों को गायन द्वारा समाज में पालन करने का संकल्प लिया। दूसरे मंत्र ओ३म् हिरण्यगर्भः …….. में बहुत ही सुंदर ढंग से सृष्टि की प्रक्रिया को समझाया। तीसरे मंत्र या आत्मदा बलदा में बच्चों ने ईश्वर से शारीरिक और आत्मिक बल वर्धन करने की कामना की। अंत में शांति पाठ के द्वारा नन्हें बच्चों ने सभी को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देकर उपस्थित अतिथिगण एवं अभिभावकों को मंत्र मुग्ध कर दिया। धर्म शिक्षिका डॉ अनीता स्नातिका ने अपने कुशल निर्देशन में बच्चों को हाव-भाव के साथ मंत्र उच्चारण सिखाया।

नाटक द्वारा घटना को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया जाता है और नृत्य नाटिका तो उसका सौंदर्यवर्धन ही कर देती है। दयानंद जी का आर्य समाज में दिए गए योगदान को ’हम करें राष्ट्र आराधन’ नृत्य नाटिका में विद्यार्थियों द्वारा अनुपम प्रस्तुति दी गई। जिसने उपस्थित सभी जनों को रोमांचित कर दिया। इस कार्यक्रम का संचालन एवं निर्देशन पूनम गक्खड़ (कोऑर्डिनेटर ड्रामाटिक क्लब) तथा नृत्य शिक्षिका दीपमाला शर्मा ने किया।

कार्यक्रम में आमंत्रित मुख्य वक्ता दिनेश चंद शास्त्री ने भी बच्चों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए वेद और वैदिक संस्कृति को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होने अथर्ववेद के आधार पर कुछ वैदिक सूत्रों को समझाया तथा इजराइल का उदाहरण देते हुए राष्ट्रप्रेम की भावना का संचार करते हुए सकारात्मक विचारों को अपनाने को कहा।

अनेकता में एकता का प्रतीक भारत की श्रेष्ठता का बखान करता हुआ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम विद्यार्थियों द्वारा सामूहिक नृत्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। नृत्य में भारत के विभिन्न राज्यों की वेशभूषा, सौंदर्य, सभ्यता एवं संस्कृति को बड़े ही मनमोहन ढंग से दर्शाकर भारत की एकरूपता को प्रदर्शित किया गया। इस नृत्य का संचालन एवं निर्देशन पूनम गक्खड़ (कोऑर्डिनेटर ड्रामाटिक क्लब) तथा नृत्य शिक्षिका दीपमाला शर्मा ने किया।

सांस्कृतिक संध्या की अगली कड़ी के रूप में विद्यालय के अध्यापक-अध्यापिकाओं द्वारा ओउम् तथा वेदों के अर्थ को मुखरित करता हुआ सुंदर भजन विभिन्न वाद्य यंत्रों के सहयोग से प्रस्तुत किया गया। संगीत अध्यापक हिमांशु गुप्ता के इस स्वरचित भजन ने दर्शकों को ओउम् की गंगा में सराबोर कर दिया।

भगवान श्रीकृष्ण के गीता के ज्ञान और शून्य का आविष्कार किस मंत्र से हुआ मंत्र को शास्त्रीय एवं पाश्चात्य गायन संगम द्वारा विद्यार्थियों ने विभिन्न वाद्य यंत्रों का प्रयोग कर कार्यक्रम की श्रृंखला को आगे बढ़ाया।

कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि आमंत्रित मुकुल सती राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा, देहरादून, उत्तराखंड ने उपस्थित जनों को उद्बोधित करते हुए भारतीय संस्कृति को महान बताया । प्रधानाचार्य जी के मार्गदर्शन में आयोजित अद्भुत वैदिक चेतना सम्मेलन कार्यक्रम में दी गई सभी प्रस्तुतियों की भूरि- भूरि प्रशंसा की। विद्यार्थियों का उत्साह वर्धन करते हुए उन्हें समय के महत्व को समझने और जीवन में अपनाने तथा अच्छे -बुरे की समझ के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। अपनी प्रतिभा को पहचानने एवं लेखन कौशल में भी पारंगत होने की बात कही। कार्यक्रम के सफल आयोजन व्यवस्था के लिए विद्यालय प्रमुख एवं समस्त अध्यापक- अध्यापिकाओं के कार्य की सराहना की।

कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथि योगेश भट्ट जी राज्य सूचना आयुक्त, देहरादून ने वैदिक चेतना व वैदिक संस्कृति के महत्व को बताते हुए कहा कि बच्चों को संस्कृति और संस्कार की शिक्षा या तो परिवार से मिलती है या फिर विद्यालय से मिलती है। लोकतंत्र, सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त भारत बने ऐसी इच्छा जताते हुए यह भी कहा कि डीएवी संस्थाएं इस कार्य को बहुत अच्छे ढंग से निभा रही है।

कार्यक्रम को अंतिम पड़ाव की ओर ले जाते हुए विद्यार्थियों द्वारा ऐतिहासिक नाटक महाराणा प्रताप प्रस्तुत किया गया जिसके अंतर्गत महाराणा प्रताप के जीवन को दर्शाया गया कि किस प्रकार से हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप ने शत्रु के समक्ष हार नहीं मानी और अपनी मातृभूमि के लिए प्राण गवाने को प्राथमिकता दी। दर्शकों की तालियों की अनवरत गड़गड़ाहट के द्वारा ऐतिहासिक नाटक की सफल प्रस्तुति को सराहा गया। नाटक ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार किया। नाटक का संचालन अनिता रावत, श्वेता वत्स तथा विनीता मलकानिया विद्यालय की कुशल अध्यापिकाओं द्वारा किया गया।

मंच संचालिका प्रतिभा शर्मा द्वारा सर्वप्रथम गणमान्य अतिथियों एवं अभिभावकों, मीडिया प्रभारी एवं विद्यालय की सुपरवाइजरी हैड्स कुसुम बाला त्यागी एवं हेमलता पाण्डेय का धन्यवाद ज्ञापन किया गया। उसके पश्चात कार्यक्रम के आयोजन में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी लोगों का भी उन्होंने हृदय से धन्यवाद दिया। प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।



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